2 जून – श्रीरामचरितमानस की भाव सहित चौपाई
नमो राघवाय 🙏
नमामि भक्त वत्सलं ।
कृपालु शील कोमलं ।।
भजामि ते पदांबुजं ।
अकामिनां स्वधामदं ।।
( अरण्यकांड, छंद 1)
राम राम 🙏🙏
चित्रकूट से चलकर श्री राम जी पूज्य अत्रि मुनि के आश्रम आए हैं, मुनि जी दौड़कर प्रभु को आश्रम के अंदर ले आए हैं, पूजन के उपरांत फल मूल खाने के लिए दिए हैं फिर श्री राम जी की स्तुति करते हुए कहते हैं कि हे भक्तवत्सल ! हे कृपालु ! हे कोमल स्वभाव वाले ! श्री राम मैं आपको कोटि कोटि नमन करता हूँ। निष्काम पुरुषों को अपना परमधाम देने वाले प्रभू मैं आपके नाम को भजता हूं तथा आपके चरण कमलों को ध्यान करता हूँ।
भक्तों! निष्कामता प्रभु को भाती है जबकि मनुष्य सकाम रहता है । जबकि निष्काम भजन अप्राप्य भी प्राप्त कराता है जबकि सकाम भजन मनुष्य को अधीर बनाता है । अतः निष्काम भजन कर श्री राम पद प्राप्त करें…..श्रीराम जय राम जय जय राम, श्री राम जय राम जय जय राम। जय सियाराम जय जय सियाराम जानकीवल्लभ राजाराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम 🚩🚩🚩
संकलन तरूण जी लखनऊ

