श्रीरामचरितमानस की भाव सहित चौपाई

28 जुलाई- श्रीरामचरितमानस की भाव सहित चौपाई
नमो राघवाय। 🙏

जेहिं आश्रम तुम्ह बसब
पुनि सुमिरत श्रीभगवंत ।
ब्यापिहि तहँ न अबिद्या
जोजन एक प्रजंत ।।
( उत्तरकांड, दो. 113)
राम राम 🙏🙏
श्री लोमश ऋषि ने काकभुसुंडि को कौआ होने का श्राप दे दिया है जिसे काकभुसुंडि ने बिना बिरोध किये स्वीकार कर लिया । भगवान ने जब काकभुसुंडि को हर तरह से अपना सेवक जाना तब फिर उन्होंने मुनि की बुद्धि फेर दी है। मुनि ने बुलाया है और श्री राम मंत्र दिया है । मुनि ने फिर कहा कि भगवान का स्मरण करते हुए जिस आश्रम में आप वास करेंगे वहाँ चार कोस तक आपको माया मोह नहीं व्यापेगी,
आत्मीय जन ! हम सब माया मोह से ग्रसित हैं परंतु मन से सतत राम स्मरण करने पर माया मोह दूर भागती है , पास नहीं आती है और जीवन आनंदमय हो जाता है। अतः कहीं भी विचरण करें बस निरन्तर श्री सीताराम नाम का सुमिरन करते रहें । अथ ….. श्री राम जय राम जय जय राम, सीताराम जय सीताराम, जय सियाराम जय जय सियाराम, जानकीवल्लभ राजाराम जय रघुनंदन जय सियाराम । सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम 🚩🚩🚩 संकलन तरूण जी लखनऊ

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