16 अगस्त – श्रीरामचरितमानस की भाव सहित चौपाई
नमो राघवाय 🙏
भए बरन संकर कलि
भिन्नसेतु सब लोग ।
करहिं पाप पावहिं दुख
भय रुज सोक बियोग ।।
( उत्तरकांड, दो. 100)
राम राम 🙏🙏
श्री राम कथा सुनाने के बाद काकभुसुंडि जी अपने मोह की कथा गरुड़ जी को सुना रहें हैं , उस समय कलियुग था। वे कहते हैं कि इस समय लोग वर्णसंकर और मर्यादाहीन हो गए, पाप रत थे, परिणाम में उनके जीवन में दुःख , भय , शोक , रोग और वियोग ब्याप्त हो गया था ।
आत्मीय जन ! इस कलिकाल में भी सब मर्यादाहीन आचरण कर रहें हैं, पाप परायण हैं। परिणाम में सब ओर दुख ही दुख, भय, शोक ब्याप्त है । जो मर्यादा में रह रहा है वही सुखी है। श्री राम जी मर्यादा पुरुषोत्तम हैं, जो श्री राम जी की मर्यादा का पालन कर रहा है वही शोकमुक्त है। अथ….. श्री राम जय राम जय जय राम, श्री राम जय राम जय जय राम, सीताराम जय सीताराम, जय सियाराम जय जय सियाराम, जय रघुनंदन जय सियाराम जानकीवल्लभ राजाराम, सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम,
हाथी घोड़ा पालकी जय कन्हैया लाल की….. 🚩🚩🚩 संकलन तरूण जी लखनऊ

