2 सितम्बर – श्रीरामचरितमानस की भाव सहित चौपाई
नमो राघवाय 🙏
रामु सत्यसंकल्प प्रभु
सभा कालबस तोरि ।
मैं रघुबीर सरन अब,
जाउँ देहु जनि खोरि ।।
( सुंदरकांड , दो. 41)
राम राम 🙏🙏
विभीषण ने रावण को बहुत समझाया पर रावण अंत में विभीषण पर पद प्रहार करता है। इस पर भी विभीषण ने उसे श्री राम भजन करने के लिए कहा, जब वह नहीं सुनता है तब विभीषण उससे कहते हैं कि श्री राम जी सत्यसंकल्प व सर्वसमर्थ प्रभु हैं और तुम व तुम्हारी सभा काल के वश में है । मैं श्री राम जी की शरण में जा रहा हूँ, अब मुझे दोष नहीं देना ।
आत्मीय जन ! रावण ने विभीषण को पद प्रहार किया तो विभीषण ने श्री राम शरण ले ली । हम आप तो दिन भर अपमान सहते रहते हैं पर अभी तक श्री राम शरण नहीं ली है कारण हम असत्य को ही सत्य व समर्थ मान बैठे हैं जबकि श्री राम जी ही परम सत्य व सर्व समर्थ हैं । अतः देर न करें, असत्य छोड़ सत्य पकड़े, श्री राम जी को पकड़े, रघुनाथ जी को पकड़े । अथ…… श्री राम जय राम जय जय राम, सीताराम जय सीताराम, जय सियाराम जय जय सियाराम, जय रघुनंदन जय सियाराम जानकीवल्लभ राजाराम । सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम 🚩🚩🚩 संकलन तरूण जी लखनऊ

