7 सितम्बर – श्रीरामचरितमानस की भाव सहित चौपाई
नमो राघवाय 🙏
आकर चारि लाख चौरासी,
जोनि भ्रमत यह जिव अबिनासी।
फिरत सदा माया कर प्रेरा ।
काल कर्म सुभाव गुन घेरा ।।
कबहुक करि करुना नर देही ।
देत ईस बिनु हेतु सनेही ।।
( उत्तरकांड 43/2-3)
जय सियाराम 🙏🙏एक बार श्री राम जी ने सभी नगरवासियों को अपनी सभा में बुलाया। गुरुदेव वसिष्ठ सहित सभी मुनि व ब्राह्मण भी सभा में आए । श्री राम जी कहते हैं कि इस शरीर का उद्देश्य इसे विषयों में न लगाकर परमार्थ में लगाना है। यह अविनाशी जीव चौरासी लाख योनियों में माया के वशीभूत होने के कारण भटकता रहता है, जबकि अकारण स्नेह करने वाले ईश्वर दया करके इसे मानव शरीर देते हैं ।
आत्मीय जनों ! श्री राम जी ने करूणा करके हमें आपको यह मानव देह प्रदान की है । इस अवसर को ब्यर्थ में न गँवाए, इसे केवल विषयों में न लगाएँ अन्यथा पुनः चौरासी लाख योनियों में भटकना पड़ेगा, अनेकों कष्ट सहना पड़ेगा। इसे विषय रस से हटाकर श्री राम रस में लगाएँ, श्री राम रस में डुबाएँ जिससे फिर पछताना न पड़े । अस्तु……श्री राम जय राम जय जय राम, सीताराम जय सीताराम, जय सियाराम जय जय सियाराम, जय रघुनंदन जय सियाराम जानकीवल्लभ राजाराम ।
सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम 🚩🚩🚩 संकलन तरूण जी लखनऊ

