10 सितंबर- श्रीरामचरितमानस की भाव सहित चौपाई
नमो राघवाय। 🙏
मम माया संभव संसारा ।
जीव चराचर बिबिधि प्रकारा
सब मम प्रिय सब मम उपजाए
सब ते अधिक मनुज मोहि भाए
( उत्तरकांड 85/2)
राम राम 🙏🙏
काकभुसुंडि जी को अपनी भक्ति देने के बाद श्री राम जी उनको समझाते हुए कहते हैं कि यह सारा संसार मेरी माया से उत्पन्न हुआ है, इसमें अनेकों प्रकार के चर अचर जीव हैं। वे सब मुझे प्रिय हैं, कारण सब मेरे उत्पन्न किए हुए हैं , परंतु मनुष्य मुझे सबसे अधिक अच्छे लगते हैं ।
आत्मीय जन ! श्री राम जी को अपनी कृतियों में मानव सर्वाधिक प्रिय लगते हैं परंतु हमीं अपने मूल को भूले हुए हैं । यह मूल की भूल हम पर बहुत भारी पड़ती है । अतः ऐसा न करें , राम स्मरण करें , राम स्मरण में रहें । अथ…….श्री राम जय राम जय जय राम, सीताराम जय सीताराम, जय सियाराम जय जय सियाराम, जय रघुनंदन जय सियाराम जानकीवल्लभ राजाराम । सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम 🚩🚩🚩 संकलन तरूण जी लखनऊ

