24 सितंबर- श्रीरामचरितमानस की भाव सहित चौपाई
नमो राघवाय 🙏
समुझि मोरि करतूति कुलु
प्रभु महिमा जियँ जोइ ।
जो न भजइ रघुबीर पद
जग बिधि बंचित सोइ ।।
( अयोध्याकाण्ड, दो195 )
जय सियाराम🙏
श्री राम जी से मिलने जाते समय श्री भरत जी की भेंट निषादराज से होती है । श्री भरत जी के प्रेम को देखकर निषादराज प्रेम मगन हो गया । वह सोचता है कि कहाँ मेरा छोटा काम व कुल तथा कहाँ श्री राम जी की महिमा । उन्होंने मुझे अपना कर मुझ पर कृपा कर दिया । ऐसे श्री राम जी का जो भजन नहीं करता है वह विधाता के द्वारा जगत में ठगा गया है ।
श्री सीताराम प्रेमी जन ! श्री राम कृपा के कारण ही हम आप बेहतर जीवन जी रहें हैं , अपने पर श्री राम कृपा को याद कर हम अभी भी श्री राम नाम के भजन में रत नहीं हुए हैं तो समझ लें कि विधाता ने हमें ठगा है । अतः ठगे न जाएँ, अपने को श्री राम भजन में लगाएँ । अथ….. श्री राम जय राम जय जय राम, सीताराम जय सीताराम, जय सियाराम जय जय सियाराम, जय रघुनंदन जय सियाराम जानकीवल्लभ राजाराम ।
सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम 🚩🚩🚩

