श्रीरामचरितमानस की भाव सहित चौपाई

29 सितंबर- श्रीरामचरितमानस की भाव सहित चौपाई
नमो राघवाय 🙏

बचन कायँ मन मम गति जाही ।
सपनेहुँ बूझिय बिपति कि ताही।
कह हनुमंत बिपति प्रभु सोई ।
जब तव सुमिरन भजन न होई ।।
( सुंदरकांड 31/1-2)
राम राम 🙏🙏
श्री हनुमान जी माता सीता जी का पता लगाकर लंका से वापस आ गये हैं । वे श्री राम जी से कहते हैं कि माँ का एक एक पल एक एक कल्प के समान बीत रहा है , आप जल्दी चलें , निसाचरो को मार कर उन्हें लिवा आएँ । श्री राम जी ने हनुमान जी से पूछा कि जो मन , वचन एमएमmwnnqnwnhwwj के व कर्म से मेरे में लगा हो , क्या उसे स्वप्न में भी विपत्ति पड़ सकती है ? श्री हनुमान जी कहते हैं कि प्रभु ! विपत्ति तो तभी पड़ जाती है जब वह आपका सुमिरन , भजन न करने की भूल कर बैठता है ।
आत्मीय जनों ! भगवान का सुमिरन व भजन विपत्ति नाशक और संपत्ति रक्षक है । जिसने भी अपने को श्री राम नाम सुमिरन व भजन में लगाया है , विपदाएँ उससे विमुख हो जाती हैं, अतएव निष्कंटक जीवन हेतु , श्री सीताराम नाम का सुमिरन करें । सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम 🚩🚩🚩
संकलन तरुण जी लखनऊ

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