श्रीरामचरितमानस की भाव सहित चौपाई

11 एवं 12 अक्तूबर – श्रीरामचरितमानस की भाव सहित चौपाई
नमो राघवाय 🙏

कर्म बचन मन छाडि.
छलु जब लगि जनु न तुम्हार।
तब लगि सुखु सपनेहुँ नहीं,
किएँ कोटि उपचार ।।
( अयोध्याकाण्ड, दो. 107)
राम राम 🙏🙏
वन जाते हुए श्री राम जी महर्षि भरतद्वाज मुनि के आश्रम आते हैं । मुनि जी श्री राम दर्शन पाकर कहते हैं कि आज मेरा तप , तीर्थ वास , त्याग सब सफल हो गया । जब तक कर्म , वचन व मन से छल छोड़ कर कोई आपका दास नहीं हो जाता है तब तक करोड़ों उपाय करने पर भी वह स्वप्न में भी सुख नहीं पाता है ।
आत्मीय जन ! जब तक श्री राम जी से कुछ इच्छा पूर्ति की चाह रहेगी तब तक जीव में छल बना रहता है , जैसे ही केवल श्री राम सेवा , समर्पण का भाव आता है तब छल छूट जाता है व जीव सुखी हो जाता है । अतः अपना सेवा व समर्पण बढ़ाएँ और सर्वविध सुख पाएँ । अथ….. श्री राम जय राम जय जय राम, सीताराम जय सीताराम, जय सियाराम जय जय सियाराम,, जय रघुनंदन जय सियाराम जानकीवल्लभ राजाराम ।
सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम 🚩🚩🚩
संकलन तरुण जी लखनऊ

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