31 अक्टूबर-श्रीरामचरितमानस की भाव सहित चौपाई
नमो राघवाय 🙏
ईस्वर जीव भेद प्रभु,
सकल कहौ समुझाइ।
जातें होइ चरन रति,
सोक मोह भ्रम जाइ ।।
( अरण्यकांड , दो. 14)
जय सियाराम 🙏🙏
चित्रकूट से श्री राम जी आगे चलते हैं और मुनियों को उनके आश्रम जा जाकर दर्शन देते हैं । फिर अगस्त्य मुनि ने जैसा बताया था उसी के अनुसार पंचवटी में गोदावरी नदी के तट पर रहने लगते हैं । एक दिन श्री लक्ष्मण जी ने श्री राम जी से कहा कि प्रभु ! मुझे ईश्वर और जीव का भेद समझाकर बताइए, जिससे आपके चरणों में मेरी और प्रीति हो तथा शोक, मोह व भ्रम नष्ट हो जाएँ ।
बंधुवर ! ईश्वर व जीव का भेद जब समझ में आ जाता है तब प्रभु चरणों में प्रेम हो जाता है और जीवन से शोक, मोह व भ्रम समाप्त हो जाते हैं। संत ही भगवंत को जानते हैं। अतः खूब प्रयास करके सत्संग करें तथा अपने जीवन में अधिक से अधिक श्री राम भक्ति बढ़ाए। अतएव सत्संग के साथ साथ सतत श्री सीताराम नाम का भजन भी करते रहें। अथ….श्री राम जय राम जय जय राम, सीताराम जय सीताराम, जय सियाराम जय जय सियाराम, जय रघुनंदन जय सियाराम जानकीवल्लभ राजाराम । सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम 🚩🚩🚩
संकलन तरुण जी लखनऊ

