2 नवम्बर- श्रीरामचरितमानस की भाव सहित चौपाई
नमो राघवाय 🙏
मोहमूल बहु सूल प्रद,
त्यागहु तम अभिमान।
भजहु राम रघुनायक,
कृपा सिंधु भगवान।।
( सुंदरकांड , दो23)
राम राम🙏🙏
श्री हनुमान जी को नागपाश में बांधकर मेघनाद उन्हें रावण के दरबार में ले आया है, वे रावण के प्रश्नों का उत्तर देते हैं और फिर उसे समझाते हुए कहते हैं कि मोह ही जिसका मूल है ऐसे पीड़ा देने वाले अभिमान को छोड़कर कृपा के सागर श्री राम जी का आप भजन कीजिए ।
आत्मीय जन ! जीवन में सीताराम नाम सुमिरन नहीं है इसीलिए हममें अज्ञान है, पीड़ा है, लोभ है, मोह है,अभिमान है। जब नाम सुमिरन बढ़ेगा तो स्वतः अज्ञान छूटेगा, मोह टूटेगा, लोभ हटेगा, अभिमान का पहाड़ गलेगा और पीड़ा मिटेगा। अतएव जीवन को निष्कंटक बनाने के लिये केवल श्री सीताराम नाम सुमिरन करें । अथ…..श्री राम जय रामजय जय राम, सीताराम जय सीताराम, जय सियाराम जय जय सियाराम, जय रघुनंदन जय सियाराम जानकीवल्लभ राजाराम । सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम 🚩🚩🚩
संकलन तरुण जी लखनऊ

