16 नवम्बर – श्रीरामचरितमानस की भाव सहित चौपाई
नमो राघवाय 🙏
जल भरि नयन कहहिं रघुराई ।
तात कर्म निज तें गति पाई ।।
परहित बस जिन्ह के मन माहीं
तिन्ह कहुँ जग दुर्लभ कछु नाहीं
( अरण्यकांड 30/4-5)
राम राम 🙏🙏
माता सीता जी को खोजते हुए श्री राम जी घायल जटायु के पास पहुँचे हैं जो श्री राम दर्शन के लिए जीवित हैं । जटायु जी कहते हैं कि अब आपके दर्शन हो गये , अब चलना चाहूँगा । श्री राम जी ने सजल नेत्रों से कहा कि आपको यह गति आपके कर्मों के कारण मिली है, जिनके मन में दूसरे का हित करना बसता है उनके लिए जगत में कुछ भी दुर्लभ नहीं है ।
परहित क्या नही सुलभ करा सकता है ? श्री राम दर्शन भी करा सकता है। परहित का भाव बढ़ाने के लिये श्री सीताराम नाम का भजन निरन्तर करना पड़ेगा। अतएव परहित कर परमात्मा को पा लें । अथ……श्री राम जय राम जय जय राम, सीताराम जय सीताराम, जय सियाराम जय जय सियाराम, जय रघुनंदन जय सियाराम जानकीवल्लभ राजाराम । सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम 🚩🚩🚩

