श्रीरामचरितमानस की भाव सहित चौपाई

18 नवंबर-श्रीरामचरितमानस की भाव सहित चौपाई

एहिं कलिकाल न साधन दूजा ।
जोग जग्य जप तप ब्रत पूजा ।।
रामहि सुमिरिअ गाइअ रामहि ।
संतत सुनिअ राम गुन ग्रामहि ।।
( उत्तरकांड 129/3)
राम राम जी 🙏🙏
श्री राम कथा पूर्ण करते हुए पूज्यपाद गोस्वामी श्री तुलसीदास जी महाराज कहते हैं कि इस कलिकाल में योग , यज्ञ , जप तप , व्रत और पूजा आदि कोई दूसरा साधन नहीं है, बस श्री राम स्मरण, श्री राम गुणगान और निरंतर श्री राम गुण समूहों को सुनना चाहिए ।
आत्मीय जन ! इस कलिकाल में जब अन्य साधन दूषित हो गये हों तो ऐसे में श्री राम कृपा पाने का एकमात्र साधन श्री राम स्मरण, श्री राम गुणगान करना व सतत श्री राम गुणों को सुनना है । अथ…..श्री राम जय राम जय जय राम, सीताराम जय सीताराम, जय सियाराम जय जय सियाराम, जय रघुनंदन जय सियाराम जानकीवल्लभ राजाराम । सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम
संकलन तरुण जी लखनऊ
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