श्रीरामचरितमानस की भाव सहित चौपाई

16 मार्च – श्रीरामचरितमानस की भाव सहित चौपाई
नमो राघवाय 🙏

आकर चारि लाख चौरासी ।
जोनि भ्रमत यह जिव अबिनासी
फिरत सदा माया कर प्रेरा ।
काल कर्म सुभाव गुन घेरा ।।
कबहुक करि करुना नर देही ।
देत ईस बिनु हेतु सनेही ।।
( उत्तरकांड 43/2-3)
राम राम 🙏🙏
एकबार राम जी ने सभी नगरवासियों को अपनी सभा में बुलाया है । वसिष्ठ गुरु सहित सभी मुनि व ब्राह्मण भी सभा में आए हैं । राम जी कहते हैं कि इस शरीर का उद्देश्य इसे विषयों में न लगाकर परमार्थ में लगाना है ।यह अविनाशी जीव चौरासी लाख योनियों में माया के वशीभूत होने के कारण भटकता रहता है । अकारण स्नेह करने वाले ईश्वर कभी दया करके इसे मानव शरीर देते हैं ।
राम जी ने करूणा करके हमें आपको यह मानव देह प्रदान की है । इस अवसर को ब्यर्थ में न गँवाए , इसे विषयों में न लगाएँ अन्यथा पुनः चौरासी लाख योनियों में भटकना पड़ेगा , अनेकों कष्ट सहना पड़ेगा । इसे विषय रस से हटाकर राम रस में लगाएँ , राम रस में डुबाएँ जिससे फिर पछताना न पड़े । अस्तु ! राम राम राम , जय राम राम राम 🚩🚩🚩
संकलन तरूण जी लखनऊ

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