श्रीरामचरितमानस की भाव सहित चौपाई

17 दिसंबर.श्रीरामचरितमानस की भाव सहित चौपाई
नमो राघवाय 🙏

नाथ एक बर मागउँ
राम कृपा करि देहु ।
जनम जनम प्रभुपद कमल
कबहुँ घटै जनि नेहू ।।
( उत्तरकांड , दो. 49)
राम राम जी 🙏
श्री राम जी के राजा बनने के कुछ दिनों बाद गुरुदेव वशिष्ठ जी श्री राम जी के पास आते हैं । श्री राम जी उनका बहुत आदर करते हैं। गुरुदेव श्री वशिष्ठ जी कहते हैं कि वही गुणवान, पंडित व तत्वज्ञ है जिसका आपके चरणों में प्रेम होता है। हे राम जी ! मैं आपसे एक वर माँगता हूँ , कृपा करके दीजिए, आपके चरणकमलों में मेरा प्रेम जन्म जन्मांतर कभी न कम हो ।
आत्मीय जन ! एक श्री वशिष्ठ जी हैं जो जन्म जन्मांतर श्री राम चरणों में प्रेम माँगते हैं और दूसरी ओर हम आप हैं जो श्री राम चरणों में प्रेम के बजाय उनसे सदा संसार की असार वस्तुओं को मांगते फिरते हैं और सदा असंतुष्ट रहते हैं। कृपया विचार करें तथा श्री राम जी से श्री राम चरणों की भक्ति और शरणागति मांगे। अथ……श्री राम जय राम जय जय राम, सीताराम जय सीताराम, जय सियाराम जय जय सियाराम, जय रघुनंदन जय सियाराम जानकीवल्लभ राजाराम । सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम संकलन तरुण जी लखनऊ
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