31 दिसंबर- श्रीरामचरितमानस की भाव सहित चौपाई
नमो राघवाय 🙏
कह सुग्रीव सुनहु रघुराई ।
आवा मिलन दसानन भाई ।।
भेद हमार लेन सठ आवा ।
राखिअ बाँधि मोहि अस भावा
सखा नीति तुम्ह नीकि बिचारी
मम पन सरनागत भयहारी ।।
( सुंदरकांड 42/2-4)
राम राम जी 🙏🙏
विभीषण श्री राम जी की शरण में आए हैं, सुग्रीव बताते हैं कि रावण का भाई आपसे मिलने आया है। श्री राम जी ने सुग्रीव से उनका मत जानना चाहा, सुग्रीव कहते हैं कि हमारा भेद लेने आया है , मेरा मत है कि इसे बाँध कर रखा जाए। श्री राम जी कहते हैं कि मित्र! नीति तो तुम ठीक कहते हो परंतु मेरा प्रण तो शरणागत के भय को हर लेना है।
बंधुओं ! जगत व जगत के लोग तो बंधन कारक हैं जबकि जगदीश बंधन से मुक्त कर भयहीन करने वाले हैं। इसलिए जगत की नहीं श्री सीताराम जी की शरण लें और भयहीन होकर जीवन जिए । अस्तु….. श्री राम जय राम जय जय राम, सीताराम जय सीताराम, जय सियाराम जय जय सियाराम, जय रघुनंदन जय सियाराम जानकीवल्लभ राजाराम । सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम 🚩🚩🚩
संकलन तरुण जी लखनऊ

