श्रीरामचरितमानस की भाव सहित चौपाई

13 अप्रैल- श्रीरामचरितमानस की भाव सहित चौपाई
नमो राघवाय 🙏

जौं रघुबीर अनुग्रह कीन्हा ।
तौ तुम्ह मोहि दरसु हठि दीन्हा ।।
सुनहु बिभीषन प्रभु कै रीती ।
करहिं सदा सेवक पर प्रीती ।।
( सुंदरकांड 6/3)
राम राम 🙏🙏
हनुमान जी माँ को खोजते हुए लंका में विभीषण के महल पहुँचे हैं । ब्राह्मण रुप धारण कर हनुमान जी ने विभीषण को पुकारा है । विभीषण आते हैं व कहते हैं कि आप कोई हरि भक्त हैं या स्वयं राम जी हैं । हनुमान जी ने सब राम कथा सुनाई है । विभीषण कहते हैं कि राम जी ने कृपा की है तभी तो आपने दर्शन दिया है । हनुमान जी कहते हैं कि विभीषण जी सुनिए ! भगवान की यह रीति है कि वे सेवक से सदैव प्रेम करते हैं ।
भगवान का अपने सेवक से सदा प्रेम करना उनकी रीति है , यह जानते हुए भी हम आप उनके प्रेम से वंचित हैं । अस्तु भगवत प्रेम पाना चाहते हैं तो भगवत सेवा में लगें । भगवान के नाम , रुप , धाम व लीला का यशगान कर उनकी सेवा करें । अथ ! जय रघुनंदन जय सियाराम 🚩🚩🚩
संकलन तरूण जी लखनऊ

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