12 मई – श्रीरामचरितमानस की भाव सहित चौपाई
नमो राघवाय 🙏
गइ मुरछा तब भूपति जागे।
बोलि सुमंत्र कहन अस लागे ।
रामु चले बन प्रान न जाहीं ।
केहि सुख लागि रहत तन माहीं ।
( अयोध्याकाण्ड 80/3)
राम राम 🙏🙏
कैकेई ने दशरथ जी से दो वरदान माँग लिए हैं । राम जी ने अयोध्या को वशिष्ठ जी को सौंप कर उनसे सबकी देखभाल माता पिता की भाँति करने की प्रार्थना कर वन के लिए चल पड़े हैं । इधर जब दशरथ जी होश में आते हैं तो सुमंत्र को बुलाकर कहते हैं कि राम वन को चले गये पर मेरे प्राण नहीं जा रहें हैं। पता नहीं किस सुख के लिए ये शरीर में बने हुए हैं ।
सबसे बड़ा सुख राम सुख है जिसके पास राम सुख है उसे कोई दुख नहीं है अन्यथा जीवन में दुख ही दुख है । अत: राम जी का साथ करें, राम संग रहें । अथ ! राम राम जय राम राम
संकलन तरूण जी लखनऊ

