आर एल पाण्डेय
लखनऊ। उत्तर प्रदेश कोचिंग संघ के प्रदेश अध्यक्ष बादल चोपड़ा ने राजाजीपुरम में स्थित दास कोचिंग में एक मुलाकात में जाति व वर्ण व्यवस्था पर चोट करते हुए कहा कि संपूर्ण ब्रह्मांड में ऐसी व्यवस्था नहीं है जो हमारे देश में…. क्या प्रारंभ से हमारा देश ऐसा था या कुछ तथाकथित लोगों के षड्यंत्र ने इसको ऐसा बना दिया।इस पर प्रश्न चिन्ह हैं? आओ हम सब मिलकर यह संकल्प लेते हैं कि संपूर्ण भारत वर्ष से इस व्यवस्था को नष्ट कर देंगे। इसका मुझे कोई जवाब दें, जब अस्पताल में जीवन मृत्यु के दंश को हमारा सगा संबंधी झेल रहा होता और उस समय चढ़ाए गए रक्त के पॉलिथीन पर क्या जाति लिखी होती है? स्वास्थ्य समस्याओं के चलते किसी महिला को ब्लड बैंक द्वारा चढ़ाए गए रक्त के पश्चात जन्म लेने वाले शिशु की शरीर में जिस रक्त का संचार होता है क्या उस शिशु की जाति किसी को पता होती है? कौन द्विज और कौन शूद्र… क्या इसी भ्रम में हम जीते रहेंगे। शूद्र कौन है? यदि रक्त से था तो मुझे जवाब मिल जाता। अब मैं बताता हूं शूद्र कौन है ..शुद्र जो अपने विचारों से निकृष्ट, उसे पशु से प्रेम नहीं, प्रकृति से प्रेम नहीं, मनुष्य से प्रेम नहीं सिर्फ और सिर्फ अपने लिए जीता है। उसके लिए स्त्री एक वस्तु मात्र,अपने बूढ़े मां बाप व समस्त बुजुर्गों के लिए विष के समान है क्योंकि उसमें ना आदर हैं ना सम्मान है। शायद ये ही शूद्र है।

