सृष्टि फाउंडेशन द्वारा नेशनल गैलरी ऑफ़ माडर्न आर्ट में हुआ “कर्मा “नाटक का मंचन

सृष्टि फाउंडेशन द्वारा नेशनल गैलरी ऑफ़ माडर्न आर्ट में हुआ “कर्मा “नाटक का मंचन

मुंबई : नेशनल मॉडर्न आर्ट गैलरी में सृष्टि फाउंडेशन के तत्वावधान में मंचित हिंदी नाटक ‘कर्मा’ ने दर्शकों को भावनाओं, व्यंग्य और नाटकीय मोड़ों का अनोखा रोलर कोस्टर राइड प्रदान किया। यह सामाजिक व्यंग्य नाटक आज के रिश्तों की कड़वी सच्चाई को उजागर करता है, जहां सभी संबंध लाभ-हानि के लेन-देन पर टिके नजर आते हैं। नाटक की मुख्य पात्र रीमा की दर्दभरी कहानी ने दर्शकों में भारतीय मूल्यों पर सवाल खड़े कर दिए, साथ ही एक सकारात्मक संदेश भी दिया।

नाटक की केंद्रीय कहानी एक शांत, पारंपरिक और प्रतिभाशाली महिला रीमा के इर्द-गिर्द बुनी गई है, जिसकी कम उम्र में शादी हो जाती है। एक आदर्श पत्नी और बहू होने के बावजूद, बेटे के जन्म के बाद भी उसका पति पैसे व सत्ता के लालच में अपनी बॉस की बेटी से शादी कर उसे त्याग देता है। मायके लौटने पर ननद शोभा के तानों और समाज की उपेक्षा का सामना करते हुए रीमा नौकरी शुरू करती है, जो बाद में व्यवसाय का रूप ले लेती है।

कहानी में मोड़ तब आता है जब रीमा का बेटा राहुल डॉक्टर बनने के सपने के लिए विदेश जाना चाहता है। बेटे की फीस के लिए रीमा अपनी मां का आखिरी घर गिरवी रख देती है। राहुल वादा करता है कि सफल होने पर वह सारे कर्ज चुकाएगा और मां-नानी को सुखी जीवन देगा। लेकिन क्या विदेश की चकाचौंध में राहुल अपना वादा निभा पाता है? नाटक का क्लाइमेक्स इसी सवाल पर रुकता है, जो दर्शकों को सोचने पर मजबूर कर देता है। एक बेटे द्वारा मां की स्थिति को नाटक भारतीय मूल्यों पर अभिशाप बताता है, लेकिन रीमा का अंतिम संदेश समाज के लिए आशीर्वाद साबित होता है।

मुख्य भूमिकाओं में खुशबू गुप्ता ने रीमा का किरदार बखूबी निभाया, जबकि शिवाय रिशु गुप्ता, रिशु गुप्ता, रीता रानी देवी बड़ौत, रोमा राजेश ठाकुर, अविरल वर्मा, मोहम्मद असलम, विराट राज गुप्ता, हर्षित ठाकर और कुलदीप वशिष्ठ ने सहायक किरदारों से नाटक को जीवंत बनाया। निर्देशन और प्रस्तुति ने दर्शकों को अंत तक बांधे रखा।

इस सामाजिक व्यंग्य नाटक ‘कर्मा’ की शुरुवात डॉक्टर अतुल पटने डॉ कपिल सालगिया और संजीव गुप्ता(ग्लोबल मीडिया) ने दीप प्रज्वलित करके किया

नाटक के समापन पर सृष्टि फाउंडेशन के युवा अध्यक्ष बिपिन गुप्ता ने मंच पर अतिथि आईएएस अतुल पटने, डॉ. कपिल सालगिया और संजीव गुप्ता (ग्लोबल मीडिया) और कलाकारो को सम्मानित किया
यह आयोजन न केवल मनोरंजन का माध्यम बना, बल्कि सामाजिक जागरूकता का प्रतीक भी साबित हुआ। फाउंडेशन ने ऐसी प्रस्तुतियों के माध्यम से रिश्तों की असलियत पर बहस छेड़ने का संकल्प जताया।

दर्शकों की प्रतिक्रिया में एक बुजुर्ग दर्शक ने कहा, “यह नाटक घर-घर की कहानी है, जो हमें अपने रिश्तों पर पुनर्विचार करने को मजबूर करता है।” सृष्टि फाउंडेशन के अध्यक्ष बिपिन गुप्ता की ओर से भविष्य में और ऐसे सामाजिक नाटकों की घोषणा की गई है।

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