स्मृति शेष कवयित्री गीता श्रीवास्तव को भावांजलि

साहित्यिक और सांस्कृतिक संस्था कोशिश की मासिक काव्य गोष्ठी 24 जुलाई शाम जज कॉलोनी में वरिष्ठ साहित्यकार गिरीश श्रीवास्तव गिरीश के आवास पर सम्पन्न हुई!जौनपुर के प्रख्यात शायर प्रेम जौनपुरी जी अध्यक्ष व मुख्य अतिथि अब्बास अहसास व विशिष्ट अतिथि अहमद निसार रहे!प्रो आर एन सिंह ने गीता श्रीवास्तव जी के व्यक्तित्व और कृतित्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने उनकी पंक्तियों -जिनकों कंधों पर हमने उछाले कभी, वे भी कंधा मेरा आजमाने लगे।उन्हे याद करते हुए अहमद निसार ने कहा-हर कलमकार कसीदा नहीं लिखता लेकिन, हर कलमकार ने लिक्खा है कसीदा दिल का,वरिष्ठ साहित्यकार गिरीश जी का मुक्तक- मेरी बीमारियों में रात भर सोई नहीं अम्मा मुसीबत से लड़ी पर धैर्य को खोई नहीं अम्मा!!हमेशा देती थी साहस, छिपा ले ती थी आंसू को, कभी बच्चों के अपने सामने रोई नहीं अम्मा। श्रोताओं को भाव विभोर कर गया। जनार्दन अस्थाना का गीत ~~अपने बड़ों के प्यार का होता था आचमन, कितना हसीन हमारा प्यारा बालपन।। बचपन के खुशनुमा दिनों की याद करा गया। प्रखर की रचना ~भगत सिंह मरा नहीं, हर नवजवान में जिंदा है। राष्ट्रप्रेम की अलख जगा दिया।
डॉक्टर पी सी विश्वकर्मा का शेर ~~गम नही तेरी दोस्ती न मिली, गम है वजहे दुश्मनी न मिली। रामजीत मिश्र की रचना ~अभी तक हौसला हारे नहीं हैं, आशा का संदेश दे गई। गोष्ठी में आर पी सोनकर, अंसार जौनपुरी, एहसास जौनपुरी, नंदलाल समीर, अनिल उपाध्याय, अमृत प्रकाश, सुशील दुबे, फूल चंद भारती, डॉक्टर विमला सिंह, दमयंती सिंह, रमेश सेठ, सुमति श्रीवास्तव, आलोक रंजन, रूपेश साथी, शोहरत जौनपुरी, सुरेंद्र यादव, संजय सेठ जेब्रा , विपिनेश श्रीवास्तव, मोनिस जौनपुरी, लल्लन उपाध्याय, संजय उपाध्याय, ज्ञान जी ने अपनी कृतियों से भावांजलि अर्पित की।
कुमार अंकित श्रीवास्तव ने रचनाकारों के प्रति आभार व्यक्त किया। संचालन अशोक मिश्र ने किया।

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