11 दिसंबर 2024 से 11 मई 2025 तक (5 माह) की मौन यात्रा का संकल्प तिथि पूर्ण
ब्यूरो चीफ आर एल पाण्डेय
शाहजहांपुर। गीता जयंती के दिवस 11 दिसंबर 2024 को केरल (वर्तमान में बिहार) के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान का विनोबा सेवा आश्रम बरतारा शाहजहांपुर पर प्रथम बार आगमन हुआ। उनका गीता पर अद्भुत भाष्य होने के बाद बाबा विनोबा के एक वर्षीय मौन के 50 वर्ष पूर्ण होने की जानकारी देते हुए एक पट्टिका उन्होंने अनावरण की थी। जिसमें रमेश भइया के द्वारा एक वर्षीय मौन संकल्प 25 दिसंबर 2024 से 25 दिसंबर 2025 की जानकारी दी हुई थी। जिसमें 22 घंटे मौन और 11 से एक बजे अर्थात दो घंटे मौन मुक्त रहेगा। विनोबा सेवा आश्रम परिसर में स्थान की खोजबीन हुई कि कहां पर संकल्प कुटिया बने। मन में था कि बाबा विनोबा का सानिध्य भी सदा मिलता रहे इसलिए विनोबा जी की आदमकद प्रतिमा के पास ही 164 फुट (योग 11) की कुटिया बनी ।पहले टीन डालने की सारी व्यवस्था जुटी लेकिन बंदरों के भय से उसे पक्का ही किया गया। और 25 तारीख को विधिवत मौन संकल्प की शुरुआत 11 बजे श्री ब्रज गोपाल शर्मा गुरु जी के आशीर्वाद से हुई। आज पांच माह हुए प्रत्येक 11 तारीख और 25 तारीख को मौन संकल्प की एक बैठक स्वत:आश्रम परिवार के साथ हो ही जाती थी। रोज सुबह और शाम की प्रार्थना 6 बजे तो आश्रम परिवार के साथ ही होती थी। भोजन भी दोनों समय तथागत में ही करने का तय हुआ था। सुबह का काढा पांच सवा पांच बजे तक गौतम भाई जी के वेद उपनिषद वर्ग में आते समय विमला बहन बनाकर ले ही आती थीं। शाम के चार बजे कुछ ठंडा नींबू पानी या शिकंजी सीना भेज ही देती थीं। बाकी समय सब निश्चित सा है। आज आश्रम पर सुंदर सत्संग हुआ। प्रसाद तो अद्भुत था ही। अभिनंदन ने गीता प्रवचन बांटी।यह सब बहुत सुंदर कार्यक्रम हो जाने के बाद छीतेपुर में शाम को संस्कार केंद्र में जो सौ बच्चे रोज आते हैं। मन में आया कि इन सबको भी प्रसाद पहुंचाया जाए। कमलेश जी तुरंत गाड़ी लगा दिए। राकेश भाई वीरा बहन और दिव्या हमें छोड़ने छीतेपुर आए। अवस्थी जी ने माइक से कहा कि भइया जी आश्रम से प्रसाद लाए सभी बच्चे आ जाएं। देर नहीं लगी सौ सवा सौ बच्चे और उनके परिवारजन भी आ गए।सभी को प्रसाद वितरित हुआ। जब मौन संकल्प का स्थान तय हो रहा था तो छीतेपुर भी सूची में द्वितीय था। तो सोचा कि अब संकल्प अवधि का जितना समय बरतारा में गुजारा गया उतना समय संकल्पित होकर यहां सेवाधाम जयप्रभा कुटीर छीतेपुर में भी गुजारा जाए। आज मातृ दिवस भी है तो मां ने अपना संपूर्ण जीवन इसी स्थान पर गुजारा। अभी 11 दिन पहले यहां दिव्या _ मुदित की भावना से शिव भगवान की प्रतिमा शिवलिंग और नंदी के रूप में रक्षा के लिए पधारे हैं। ऐसे पावन पुनीत संकल्प की शुरुआत आज 11 मई के पावन दिन से ही की जाए। यह विचार भी अनायास मन में आया। मेरा मानना है कि अगर कुछ इस प्रकार के संकल्प अगर मन में आते हैं तो उन्हें लेने का साहस जुटाना चाहिए। तभी ईश्वर कुछ मदद करने की योजना आपके लिए बनाएगा। उसी परमपिता परमेश्वर को सौंपते है । आगे 5 माह (11 मई से 11 अक्टूबर तक जो जयप्रभा कुटीर का स्थापना दिवस भी है ) मौन संकल्प की यात्रा छीतेपुर से ही प्रवाहित होगी। अभी आज गीता स्वाध्याय बेबीनार में गीता के नवें अध्याय पर गंगा मां को सभी ने सुना । सुनकर बहुत प्रसन्नता हुई। सेवाधाम छीतेपुर में सायंकालीन प्रार्थना और आरती की तैयारी हो गई है।उसमें शरीक होने जा रहा हूं। रामहरि।

