19 अगस्त- श्रीरामचरितमानस की भाव सहित चौपाई
नमो राघवाय 🙏

उभय भाँति तेहि आनहु
हँसि कह कृपानिकेत ।
जय कृपाल कहि कपि चले
अंगद हनु समेत ।।
( सुंदरकांड , दो. 44)
राम राम 🙏🙏
विभीषण राम जी की शरण में आए हैं, सुग्रीव संदेह करते हैं और कहते हैं कि भेद लेने आया है । राम जी सबको समझाते हैं , उन्हें निर्मल मन वाला बताते हैं । वे आगे कहते हैं कि चाहे भेद लेने या भयभीत होकर आया हो ,उसे लिवा आओ, ऐसा सुनकर अंगद व हनुमान सहित वानर विभीषण को लेने के लिए चल देते है।
भगवान को तो जीव हर हाल में भाता हैं , बस हमारे अपकर्म ही हममें भेद बुद्धि पैदा कर उनकी शरण में जाने से रोकते हैं । अतएव ! सत्कर्म करें । अथ ! श्रीराम श्रीराम , जय जय राम 🚩🚩🚩
संकलन तरूण जी लखनऊ

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