17 नवम्बर- श्रीरामचरितमानस की भाव सहित चौपाई
नमो राघवाया 🙏

मोह मूल बहु सूल प्रद
त्यागहु तम अभिमान ।
भजहु राम रघुनायक
कृपा सिंधु भगवान ।।
( सुंदरकांड , दो. 23)
राम राम 🙏🙏
हनुमान जी को नागपाश से बाँध कर मेघनाद ने रावण के दरबार में लाया हुआ है । हनुमान जी ने रावण के प्रश्नों का उत्तर देने के बाद उसे समझाते हुए कहते हैं कि मोह ही जिसका मूल है , ऐसे पीड़ा देने वाले तमरूप अभिमान का त्याग कर दो और कृपा के सागर राम जी का भजन करो ।
अज्ञान अभिमान पैदा करता है , अंधकार में रखता है , पीड़ा देने वाला होता है , हमें भजन से दूर रखता है जबकि राम भजन हमें अभिमान से मुक्त कर जीवन में आनंद बढ़ाता है , राम कृपा का पात्र बनाता है । अतएव! राम कृपा पाने के लिए , राम भजें, सियाराम भजें 🚩🚩🚩
संकलन तरूण जी लखनऊ

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