अयोध्या(संवाददाता) सुरेंद्र कुमार। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के नए गठन को लेकर विवाद हो गया है। अखाड़ा परिषद के राष्ट्रीय प्रवक्ता महंत गौरी शंकर दास ने इस गठन को फर्जी बताते हुए कहा है कि 7 अखाड़ा इस गठन का विरोध कर रहे। इसमें सिर्फ सन्यासियों को ही शामिल किया गया है। जबकि सन्यासी व वैष्णव अखाड़ों को मिलाकर कुल 13 लोग खड़े हैं। जो अखाड़ा परिषद अध्यक्ष सहित कार्यकारिणी के सदस्य माने जाते हैं।अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष रहे महंत नरेंद्र गिरी की मृत्यु के बाद 25 अक्टूबर को बाघमभरी गद्दी मठ में हुए बैठक में सन्यासी निरंजनी अखाड़े के महंत रविन्द्रपुरी व उनकी कार्यकारणी का गठन किया गया था। वहीं दूसरी ओर इसके पूर्व 20 अक्टूबर को वैष्णवों महानिर्वाणी अखाड़ा के अध्यक्ष रविन्द्र पूरी को अध्यक्ष चुना गया था। जिसमें अखाड़ा परिषद के कार्यकरणी का भी चयन किया गया। जिसमे निर्वाणी, निर्मोही, दिगंबर, श्री पंच महानिर्वाणी, श्री पंच अटल, बड़ा उदासीन एवं निर्मल अखाड़ा के प्रमुख संत शामिल हुए थे। इस चुनाव में निर्मोही अखाड़ा के महंत राजेंद्र और निर्मल अखाड़ा के श्री महंत ज्ञानदेव सिंह तथा सचिव जसविंदर सिंह शास्त्री का भी समर्थन हासिल हुआ था।यह भी बात तब शुरू हुआ जब बाघमभरी गद्दी मठ पर सन्यासियों की बैठक हो गई ।अखाड़ा परिषद के प्रवक्ता महंत गौरीशंकर दास का कहना है कि 25 अक्टूबर प्रयागराज में हुए तथा कथित अखाड़ा परिषद फर्जी व भ्रमित करने वाला है । जिसमे निर्मोही व निर्मल अखाड़ा के समर्थन की बात बताई गई जिसमें दावा किया गया कि 8 अखाड़ा उनके पक्ष में है । रविन्द्र पूरी दो है एक महानिर्वाणी अखाड़ा व दूसरे निरंजनी अखाड़े से है । 8 अखाड़ों का समर्थन झूठा है निर्मोही अखाड़े के संत राजेंद्र दास हैं उन्होंने अपना समर्थन हरिद्वार में गठित अखाड़ा परिषद को दिया है । वर्तमान में वह अखाड़ा परिषद के महामंत्री भी हैं । निर्मल अखाड़ा के अध्यक्ष श्री महंत ज्ञानदेव सिंह, जसविंदर सिंह शास्त्री ने 20 अक्टूबर हरिद्वार की बैठक में समर्थन दिया है। जो इस में कोषाध्यक्ष भी हैं। अखाड़ा परिषद का गठन हमेशा बहुमत के आधार पर होता रहा है। इस बार भी 20 अक्टूबर हरिद्वार में बहुमत के आधार पर यह गठन हुआ है। जिसमें सात अखाड़े एक साथ खड़े हैं। लोकतांत्रिक व्यवस्था के तहत चुनाव किया गया है। रविंद्र पुरी जो महानिर्वाणी अखाड़ा के हैं वहीं अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष हैं और उन्हीं की कार्यकारिणी सही है। जो तथाकथित रूप से प्रयागराज के बाघमभरी गद्दी मठ में नई कार्यकारिणी बनाई गई वह फर्जी है और उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने की तैयारी की जा रही है। 20 अक्टूबर हरिद्वार में नवगठित अखाड़ा परिषद में के गठन में चारों संप्रदाय का प्रतिनिधित्व है। जिसमे बैरागी, सन्यासी, उदासी, वा निर्मल चारों संप्रदाय का प्रतिनिधि है।

