14 सितंबर
*हिंदी का मौन स्वर*
*विनोबा विचार प्रवाह परिवार के समृद्ध हस्ताक्षर इंदौर से डा पुष्पेन्द्र दुबे*
कल जब तुम किसी को
हिंदी दिवस की
शुभकामना देना
उससे पहले
सभी जगह आज से
हिंदी में *हस्ताक्षर* करना
कुछ टूटता हुआ लगेगा तुम्हें
वह और कुछ नहीं
बल्कि होगी गुलामी की
सूक्ष्म जंजीर की एक कडी,
एक बार हिम्मत कर लो
यह आदत बन जाएगी
फिर देखो भारत की बिंदी
विश्व पटल पर छा जाएगी।

