2 अप्रैल- श्रीरामचरितमानस की भाव सहित चौपाई
नमो राघवाय 🙏
श्रीगुरु चरन सरोज रज
निज मनु मुकुरु सुधारि ।
बरनउँ रघुबर बिमल जसु
जो दायकु फल चारि ।।
( अयोध्याकाण्ड, श्लोक पश्चात पहला दो. )
जय सियाराम 🙏🙏
अयोध्याकाण्ड प्रारंभ करते हुए तुलसी बाबा कहते हैं कि श्रीगुरुदेव के चरण कमलों की रज से अपने मन रूपी दर्पण को स्वच्छ करके मैं रघुनाथ जी के निर्मल यश का वर्णन करता हूँ जो धर्म अर्थ काम व मोक्ष देने वाला है।
राम यश का वर्णन हमें धर्म अर्थ काम व मोक्ष देने वाला है बस शर्त यह है कि इसका वर्णन निर्मल मन से किया जाए । निर्मल मन तो गुरु की चरन शरण से होता है । अस्तु जीवन में धर्म अर्थ काम व मोक्ष पाना चाहते हैं तो गुरु की शरण में राम यश का गान करें । अथ ! जय जय गुरुदेव , जय जय जय राम 🚩🚩🚩
संकलन तरूण जी लखनऊ

