5 जनवरी – श्रीरामचरितमानस की भाव सहित चौपाई
नमो राघवाय 🙏
बचन कर्म मन मोरि गति
भजनु करहिं नि:काम ।
तिन्ह के हृदय कमल महुँ
करउँ सदा बिश्राम ।।
( अरण्यकांड, दो. 16)
राम राम 🙏🙏
राम जी पंचवटी में गोदावरी नदी के निकट पर्ण कुटी बनाकर निवास करने लगते हैं । लक्ष्मण जी के प्रश्नों का उत्तर देते हुए वे कहते हैं कि जो वचन , कर्म व मन से मुझमें लगा हो और जो निष्काम भाव से मेरा भजन करता है , उसके हृदय में मैं सदा विश्राम करता हूँ ।
राम जी ने अपनी बात बताई है , हम आप राम जी के प्रति कितना समर्पित हैं , अच्छी तरह जानते हैं । अत: मन , वचन , कर्म से राम जी में मन लगाकर निष्काम भाव से उनका भजन करें , राम जी अपने हो जाएँगे । अस्तु ! राम राम जय राम राम 🚩🚩🚩
संकलन तरूण जी लखनऊ

