. ❤️ *चारीजी के मुख से* ❤️
संकलन इंजी. एस के श्रीवास्तव लखनऊ
आध्यात्मिकता कहती है, “मेरे पुत्र, वही कमाओ जिसे तुम अपने पास शाश्वत रुप से रख सकते हो।” वह क्या है? प्यार। प्यार हमें नहीं छोड़ता है, क्योंकि हमारा हृदय हमें नहीं छोड़ता। लेकिन यदि आप सही ढंग से नहीं जीते हैं तो आपका हृदय इस गलत जीवन के संस्कार अनन्त काल में ले जाता है, जब तक कि आपको ऐसा गुरु ना मिल जाए जो आपके हृदय की सफाई कर सके, आपको अपनी कृपा, अपनी दया दे सके और आपको पुनः एक मानव बना सके। यदि प्रेम के इस संदेश को आप अपने हृदय में रखते हैं और प्रेम देते चले जाते हैं तो हृदय विशाल होता चला जाता है। जैसा कि बाबूजी महाराज ने कहा है, यह तब तक अधिक और अधिकाधिक विशाल होता चला जाता है, जब तक कि संपूर्ण मानव प्रणाली में सर से पैर तक नहीं फैल जाता और अंततोगत्वा यह संपूर्ण विश्व को भर देता है। तब यदि आप से पूछा जाए, “आपका ह्रदय कहां है?” आप कह सकते हैं, “यह मेरा हृदय है।” (अपने हाथ से अपने चारों ओर एक बड़े वृत का इशारा करते हैं।)
*दिल की आवाज़ 2004* भाग-I (पृ.18)
. *हार्टफुलनेस मेडिटेशन*
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