सुगंध केवल फूल की नहीं बल्कि प्रेम अनुशासन और स्नेह की दिखाई पड़ी
शाहजहांपुर (अम्बरीष कुमार सक्सेना)
आज अवसर था शाहजहांपुर एनीमिया मुक्त करने के प्रयास का बरतारा से मात्र 3 किलोमीटर दूर गांव सिमरई की जो एक।जमाने में अपनी शरीफ दबंगई के लिए जाना जाता था। आज वहां के पूर्व माध्यमिक विद्यालय जहां 7 गांवों के लगभग 250 बच्चे दूर दूर से पढ़ने आते हैं। अमूमन ऐसा सरकारी स्कूलों के प्रति छात्रों का।प्रेम देखने को नहीं मिलता। गांव से 300 मीटर एकांत में बने इस विद्यालय की साज सज्जा सफाई और सादगी देखकर बहुत अच्छा लगा। आज मीना दिवस अपनी प्रसन्नता के साथ मना रहे थे। शिक्षक वर्ग सात का है।सब अपने अपने विषय के विशेष जानकार और प्रभारी के रूप में वह भाई जिनका बचपन अपने माता पिता के प्यार से वंचित विनोबा आश्रम की सचिव विमला बहन की स्नेह गंगा में अवगाहन किया। शुरू से ही गांधी विनोबा के विचार को आत्मसात करनेवाले कौशल भाई जिन्होंने सरैया जैसे गांव जो प्रतिवर्ष हिंसा के लिए जाना जाता था। वहां बच्चों के माध्यम से आपसी समन्वय का वातावरण बनाया। नफरत की दीवारें तोड़ने में कामयाब हुए फिर इस गांव में उन्हें इसी प्रकार की चुनौती मिली। उसे भी हंस कर बांटी। उनके साथी बेडपाल जी नंदिनी बहन, सईंम भाई मुन्ना परवीन बहन बृजदीप भाई हैं। सभी कक्षाओं की मीनाओं ने मिलकर केक काटा। कार्यक्रम में बाल विवाह और दहेज प्रथा सुंदर नाटक की प्रस्तुति की। रसोइया वर्षा बहन के हांथ की रोटी खाने का अवसर सभी को मिला। आज विमला बहन संरक्षक विनोबा सेवा आश्रम, मुदित कुमार प्रबंधक विनोबा इंटर कॉलेज, दिव्या बहन शिक्षाविद, मोहित भाई प्रभारी मोरवेल के अलावा श्रीमती पिंकी सक्सेना ने मूर्ति कला का शिवा भाई स्वाबलंबन पर और अहिंसा पुस्तकालय की प्रभारी सीना बहन ने बच्चों को अपने माता पिता को साक्षर करने के लिए प्रेरित किया। ।सभी ने बच्चों को आशीष दिए।विमला बहन ने एनीमिया मुक्ति पर विशेष व्याख्यान दिया। नंदिनी बहन ने अपने स्कूल की प्रगति से अवगत कराया। सईंम मास्टर साहब ने एनीमिया की वैज्ञानिक अप्रोच बताई।आभार वेदपाल सुमन जी और संचालन स्कूल के प्रधानाध्यापक श्री कौशल कुमार ने दिया। बच्चों के कार्यक्रमों की सराहना सभी अतिथियों ने की। बच्चों के चेहरे पर खुशी झलक रही थी किसी प्रकार का पढ़ाई का बोझ नहीं दिख रहा था।मुदित कुमार ने तो आदर्श पूर्व माध्यमिक स्कूल अपने संबोधन में कहा। विनोबा सेवा आश्रम की ओर से विनोबा जी के जीवन पर पुस्तकें देने का तय किया गया ।रमेश भइया सूत्रधार विनोबा विचार प्रवाह ने सभी शिक्षकों को उनकी उत्तम सेवाओं हेतु सम्मानित किया।

