मेडिकल कालेज जौनपुर में विश्व COPD दिवस पर जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया

मेडिकल कालेज जौनपुर में विश्व COPD दिवस पर जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन
दैनिक देश की उपासना ब्यूरो
*जौनपुर* उमानाथ सिंह स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय, जौनपुर के *प्रधानाचार्य प्रो० आर० बी० कमल के दिशा निर्देश में टी०बी० एण्ड बेस्ट विभाग के विभागाध्यक्ष डा० अचल सिंह* ने विश्व COPD दिवस पर जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया। कार्यक्रम का शुभारम्भ प्रधानाचार्य प्रो० आर०बी० कमल के उदबोधन से हुआ। उन्होंने कहा कि किसी बिमारी का समय रहते पता चल जाना ही सबसे बड़ा उपचार है। आज हमारा समाज अनेक स्वास्थ्य चुनौतियों का सामना कर रहा है, जिनमें नशे की लत एक गंभीर समस्या बनकर सामने आई है। तंबाकू, बीड़ी, सिगरेट और अन्य नशीले पदार्थों का सेवन युवओं बल्कि बुजुर्गों के स्वास्थ्य को भी लगातार नुकसान पहुँचा रहा है। उन्होंने बताया कि 50 वर्ष से अधिक आयु के लोगों में सांस फूलना, थकान, खाँसी, बलगम, सीने में भारीपन जैसी समस्याएँ तेजी से बढ़ रही हैं। उन्होंने कहा कि सर्दियों के मौसम में फेफड़ों से संबंधित रोग और अधिक तेजी से बढ़ते हैं इसलिए सावधान रहना आवश्यक है।
प्रधानाचार्य ने चिंता व्यक्त की कि आजकल जिन बीमारियों को पहले बुजुर्गों तक सीमित माना जाता था, वे अब बच्चों और युवओं में भी दिखाई देने लगी हैं, जिसका मुख्य कारण प्रदूषण, गलत जीवनशैली और नशे के बढ़ते प्रचलन हैं। उन्होंने सभी से आग्रह किया कि किसी भी प्रकार के नशीले पदार्थ का सेवन तुरंत बंद करें, क्योंकि यह शरीर फ़ेफड़ों के साथ हर अंग के साथ-को अत्यंत नुकसान पहुँचाता है।
उन्होंने उपस्थित सभी लोगों से अपील की कि
“यदि सांस लेने में परेशानी, लगातार खाँसी, कमजोरी, सीने में जकड़न जैसी कोई भी दिक्कत महसूस हो, तो इसे हल्के में न लें। तुरंत डॉक्टर से जाँच कराएँ। समय रहते किया गया उपचार जीवन बचा सकता है।
*टी०बी० एण्ड चेस्ट विभाग के विभागाध्यक्ष डा अचल सिंह* ने उपस्थित रोगियों, उनके तीमारदारों तथा प्रतिभागियों को इस बीमारी की विस्तृत जानकारी प्रदान की। उन्होंने COPD (क्रोनिक अब्स्ट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज) को तेजी से बढ़ती वैश्विक स्वास्थ्य समस्या बताते हुए कहा कि यह एक ऐसी फेफड़ों की बीमारी है जिसमें मरिज की सांस लेने की क्षमता लगातार कमजोर होती जाती है।भारत में इस बीमारी के बारे में आम जनता में जागरूकता बहुत ही कम है इसलिए आज ये जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया है।
विभागाध्यक्ष ने COPD के मुख्य लक्षण बताए-
लंबे समय से खाँसी, बलगम बनना, काम करने पर सांस फूलना, सीने में दबाव या भारीपन ,बार-बार फेफड़ों में संक्रमण होना , थकावट या कमजोरी लगना के बारे में विस्तार से बताया।उन्होने प्रतिभागियो को यह भी स्पष्ट किया कि कई मरीज इन लक्षणों को सामान्य सर्दी-जुकाम या कमजोरी समझाकर नजरअंदाज कर देते हैं, जिसके कारण बीमारी गंभीर रूप ले लेती है। उन्होंने कहा की तंबाकू बीड़ी, सिगरेट, चिलगम्, हुक्का, घरेलू धुये जैसे चूल्हे में लकड़ी या कंडे का इस्तेमाल करना, धूप,अगरबत्ती,मच्छर भागने वाले कॉइल का इस्तेमाल करना और प्रदूषण के लंबे समय तक संपर्क से COPD का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। यही कारण है कि यह बीमारी न केवल बुजुर्गों में बल्कि युवाओं में भी बढ़ती देखी जा रही है। उन्होंने तीमारदारों को समझाया कि मरीज को बेहतर उपचार मिलता रहे,इसके लिए समय समय पे अपना जांच जैसे चेस्ट का x ray , spirometry, व अन्य जांच डॉक्टर के सलाह से कराए और रिस्क फैक्टर से बचाओ करे , संतुलित आहार लें व नियमित व्यायाम करें।अन्त में विभागाध्यक्ष ने सभी रोगियों और तीमारदारों से आग्रह किया कि लक्षणों को अनदेखा न करें और फेफड़ों के स्वास्थ्य को प्राथमिकता दें।
*कार्यक्रम के दौरान *टी०बी० एण्ड चेस्ट विभाग के सहायक आचार्य डा० अभिषेक मिश्रा* ने COPD और फेफड़ों की बिमारियो के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी दी। उन्होंने बताया कि कॉप्ड (COPD) से पीड़ित व्यक्तियों में फेफड़ों के कैंसर का खतरा सामान्य लोगों की तुलना में कई गुना अधिक होता है। इसका मुख्य कारण लंबे समय तक फेफड़ों में सूजन रहना, हवा का प्रदूषित के साथ लगातार, संपर्क, तथा तंबाकू/बीड़ी/सिगरेट का सेवन है। उन्होंने इनहेलर के सही उपयोग पर विशेष जोर देत हुए कहा कि COPD और फेफड़ों की बीमारियों में इनहेलर अत्यंत प्रभवी उपचार है, लेकिन इसका सही लाभ तभी मिलता है जब मरीज इसे सही तकनीक से प्रयोग करे। उन्होंने मरीजों और तीमारदारों को इनहेलर के प्रकार, उनकी दवाओं, और उपयोग की विधि को बारे में प्रदर्शन करते हुए समझाया। डा० मिश्रा ने बताया कि गलत तरीको से इनहेलर चलाने पर दवा फेफड़ों तक नहीं पहुँचती, सिर्फ गले में जम जाती है और बीमारी नियंत्रित नहीं हो पाती, जबकि सही तकनीक अपनाने से दवा सीधे फेफड़ों में जाकर सूजन कम करती है, सांस लेने की क्षमता बढ़ाती है और रोगी की जीवनशैली सुधरती है।
*चिकित्सा अधीक्षक, डा० विनोद कुमार* ने बताया कि COPD पूरी तरह से ठीक तो नहीं होती, लेकिन समय रहते पहचान और सही उपचार से इसे नियंत्रित किया जा सकता है। उन्होंने लोगों से आग्रह किया कि जो भी व्यक्ति तंबाकू, बीड़ी, सिगरेट या किसी भी प्रकार के नशे का सेवन करते हैं, वे तुरंत इसे छोड़ दें, क्योंकि यह फेफड़ों की बीमारी को तेजी से बढ़ाता है और जीवन को खतरे में डाल सकता है। डा० विनोद कुमार ने कहा कि COPD एक गंभीर बीमारी है, लेकिन ज्ञान और जागरुकता इसके खिलाफ सबसे बड़ा हथियार है। यदि लोग शुरुआती लक्षणों पर ध्यान दे और समय पर उपचार लें, तो वे एक सुरक्षित, स्वस्थ और सामान्य जीवन जी सकते हैं।” अंत में उन्होंने मरीजों एवं तीमारदारों और आम नागरिकों से अपील की कि किसी भी श्वसन समस्या को हल्के में न लें और तुरंत चिकित्सवकीय परामर्श अवश्य लें।
*पूरे कार्यक्रम का संचालन डा० संघप्रिया* के द्वारा किया गया।
इस अवसर पर उप-प्रधानाचार्य, प्रो आशीष यादव, प्रो० उमेश सरोज, डा० सरिता पाण्डेय, डा० अरविन्द पटेल, डा० जितेन्द्र कुमार, डा० आशुतोष सिंह, डा० मुदित चौहान, डा० संजीव यादव, डा० स्वाती विश्वकर्मा, डा० रोहित सरोज, डा० प्रीति विश्वकर्मा, डा० अजय, डा० पंकज कुमार, डा निहारिका, डा० संदीप सिंह तथा नर्सिंग अधिकारी, शुभम पाण्डेय, ममता चौहान, शशी किरण, सहायक कर्मचारी अल्ताफ अहमद, मरीज व उनके
तीमारदार उपस्थित रहें।

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