चीनी टीकों की प्रभावशीलता बेहद कम, साइड इफेक्ट्स का भी जोखिम
तिब्बत प्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है, चीनी टीकों की प्रभावशीलता कम होने के कारण यहां लोगों में रोग प्रतिरोधक क्षमता कम देखी जा रही है, यही कारण है कि यहां संक्रमण इतनी गंभीर रूप ले रहा है। जिन देशों में चीनी टीके लगाए गए हैं, वहां के लोगों की भी प्रतिरक्षा पर प्रश्नचिन्ह है, वहां भी संक्रमण की स्थिति में गंभीर रोगों का खतरा हो सकता है। इस तरह के जोखिमों को ध्यान में रखते हुए सरकारों को टीकाकरण को लेकर फिर से विचार करने और लोगों को प्रभावी बूस्टर डोज लगवाने पर जोर देना चाहिए। कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि लोगों ने चीनी वैक्सीन से गंभीर साइड-इफेक्ट्स का भी अनुभव किया है, जो भी एक खतरे की तरफ इशारा करती है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इंडोनेशिया, तुर्किस्तान, ब्राजील, ईरान, पाकिस्तान, कोलंबिया, श्रीलंका, चिली, मैक्सिको, बांग्लादेश ने चीनी वैक्सीन आयात किए थे। दिसंबर 2020 में, इंडोनेशिया और ब्राजील ने शुरुआत में चीनी वैक्सीन की प्रभाविकता 78-97 फीसदी होने का भी दावा भी किया था। हालांकि अब चीन में बिगड़ते हालात को देखते हुए तुर्की सरकार ने इन टीकों की प्रभावशीलता की जांच शुरू कर दी है।
कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि चीन ने अपने वैक्सीन से होने वाले साइड-इफेक्ट्स को छिपाने के लिए डेटा टेम्परिंग भी की है, इस तरह के मामले सामने आने के बाद वैक्सीन आयात करने वाले देशों ने नए सिरे से इसकी प्रभावशीलता की जांच शुरू कर दी है।

