राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के ‘भारत मंडपम’ में आयोजित दो दिवसीय जी-20 शिखर सम्मेलन का सफल समापन हो गया है. जी-20 बैठक में भारत नई दिल्ली घोषणा पत्र पर सहमति बनाने में सफल रहा है. जिसे देश के लिए एक बड़ी कामयाबी माना जा रहा है ,और मोदी सरकार की तारीफ हो रही है. क्योंकि जब जी-20 शिखर सम्मेलन बुलाया जा रहा था, तब किसी समझौते की एवं एक संयुक्त बयान की संभावना कम लग रही थी.इसका कारण उन लोगों के बीच बढ़ी खाईं ,जो यूक्रेन में जारी युद्ध की निंदा करना चाहते थे .भारत उस अंतर को पाटने का फार्मूला खोजने में सक्षम रहा है. नि:संदेह यह भारत की एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक उपलब्धि है. क्योंकि यदि सहमति नहीं बन पाती तो यह भारत की अंतरराष्ट्रीय कमजोरी का कारण बनता.
भारत ने 55 देशों के संघ अफ्रीकी यूनियन को जिसका G20 में कोई प्रतिनिधित्व नहीं था ,में स्थाई सदस्यता दिलवाई है .जहां G20 जो विश्व के 85% GDP का नेतृत्व करने वाला संगठन है ,उसमें सदस्यता पाना अफ्रीकी देशों के लिए यादगार क्षण है. वही इस कारण भारत से उसके संबंध और गहरे होंगे .भारत अफ्रीकी देशों को अपने एक अच्छे सहयोगी के रूप में देखता है साथ ही अफ्रीकी देश भारत के डिफेंस सेक्टर , मेडिसिन सेक्टर आदि के लिए एक बड़े बाजार हैं. अफ्रीकी देशों की भारत से बढ़ती नजदीकी चीन को अच्छी नहीं लगेगी क्योंकि चीन अफ्रीका के प्राकृतिक संसाधनों के दोहन हेतु एवं अपने स्वार्थपरक नीति के चलते अपना वर्चस्व बढ़ाना चाहता है.
इसके साथ – साथ G20 शिखर सम्मेलन के पहले दिन शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक वृहद आर्थिक गलियारे “इंडिया मिडिल ईस्ट यूरोप इकोनामिक कॉरिडोर” का ऐलान किया है.इस प्रोजेक्ट में भारत, यूएई ,सऊदी अरब, यूरोपीय यूनियन, फ्रांस, इटली ,जर्मनी व अमेरिका शामिल होंगे. इस आर्थिक गलियारे का उद्देश्य मध्य पूर्व के देशों को रेलवे से जोड़ना और उन्हें बंदरगाह के माध्यम से भारत से जोड़ना है.
जहां एक ओर इस कॉरिडोर से शिपिंग समय ,लागत व ईंधन के इस्तेमाल में कटौती करके खाड़ी देशों से यूरोप तक उर्जा और ट्रेड फ्लो में मदद मिलेगी. एवं ये भारत व यूरोप के बीच व्यापार को 40% तक बढाएगा.
वहीं इस प्रोजेक्ट को चीन के BRI यानी “बेल्ट एंड रोड इनीशिएटिव ” का एक विकल्प माना जा रहा है. इस प्रोजेक्ट के जरिए भारत – अमेरिका पार्टनरशिप को मिडिल ईस्ट का सहयोग मिलने से ,ये पूरी तरह से गेम चेंजर साबित हो सकता है. खासकर तब जबकि BRI के तहत चीन का कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट पर दबदबा है. दरअसल चीन के BRI प्रोजेक्ट में खाड़ी देश अहम जगह रखते हैं .ऐसे में जी-20 शिखर सम्मेलन में यह प्रोजेक्ट लाना भारत,अमेरिका व अन्य सहयोगी देशों के लिए एक बड़ी कामयाबी है.
इस कॉरिडोर से दुनिया की कनेक्टिविटी और सस्टेनेबल डेवलपमेंट को एक नई दिशा मिलेगी और आने वाले समय में यह भारत ,पश्चिम एशिया और यूरोप के बीच आर्थिक सहयोग का एक बड़ा माध्यम होगा.लेखक यूपीएससी की तैयारी करने वाले छात्र है

