त्रेता युग में माता सीता ने भी रखा था छठ व्रत
अयोध्या(संवाददाता) सुरेंद्र कुमार।
अयोध्या राम की नगरी में छठ महापर्व हर्षोल्लास के साथ मनाई गई। 4 दिन के इस महापर्व में तीसरे दिन आज व्रती महिलाओं ने सरयु की जलधारा में खड़े होकर डूबते हुए सूरज को अर्घ्य दिया, व्रती महिलाएं पिछले 36 घंटे से निर्जल व्रत है छठ महापर्व के कठिन व्रत में सरयू के घाटों पर जो नजारा था वह भक्तिमय में था। बड़ी संख्या में महिलाओं ने सरयू की जलधारा में खड़े होकर डूबते हुए सूरज को अर्घ्य दिया है कल व्रत के आखिरी दिन व्रती महिलाएं सूर्योदय के समय जलधारा में खड़ी होकर उगते सूरज को जल दिया और इस महापर्व को बड़ी संख्या में सरयू के घाटों पर गाजे-बाजे के साथ छठ महोत्सव मना रही व्रती महिलाएं पहुंची हैं और सरयु की जलधारा में खड़ी होकर सूर्य देव की आराधना की। छठ पूजा वैसे तो बिहार और झारखंड का विशेष पर्व माना जाता है लेकिन राम नगरी अयोध्या में छठ पूजा प्राचीन परंपरा है। ऐसी मान्यता है कि जब भगवान श्री राम माता सीता का विवाह के उपरांत अयोध्या पहुंची थी तो माता सीता ने पहला छठी व्रत अयोध्या में रखा था। अयोध्या में आज भी उसी परंपरा को देखते हुए अयोध्या की रहने वाली सुहागन महिलाएं छठ व्रत के पर्व को भी बड़े ही उत्सव उल्लास के साथ मनाते हैं।छठ महापर्व पर व्रती महिलाओं कहा कि छठ महापर्व बहुत ही अच्छा पर्व है इस महापर्व के व्रत से मनोकामना की पूर्ति होती है, परिवार की कुशलता और अपने देश के लिए लोग इस व्रत में माता से पूजा करके आशीर्वाद मांगते हैं छठ मां सभी की मनोकामना पूरी करती हैं पूरे श्रद्धा योग से हम इस महापर्व को मनाते हैं। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ने बताया कि छठ महापर्व पर सुरक्षा की पर्याप्त व्यवस्था की गई है भीड़ कंट्रोल ट्रैफिक से लेकर सिविल पुलिस को लगाया गया है इसके अलावा पानी में जल पुलिस और एसडीआरएफ की तैनाती की गई है इसके अलावा छठ पूजा को देखते हुए जितने भी इनपुट हैं उनकी पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था की गई है जिस से आने वाली भक्तों को कोई कठिनाई का सामना ना करना पड़े।

