अयोध्या।(राजेश श्रीवास्तव ब्यूरो चीफ अयोध्या) छठ पर्व पर अयोध्या और उससे जुड़े फैजाबाद नगर के सरयू नदी पर बने सभी घाटों पर छठ महापर्व की धूम देखने को मिली।ज्यों-ज्यों सूर्यास्त का समय नजदीक आता रहा त्यों- त्यों आस्था का सैलाब घाटों पर गहराता चला गया। बाजे- गाजे और गीत- मंगल के साथ व्रती महिलाएं और परिजन अस्ताचलगामी भगवान भास्कर की प्रतीक्षा में आ खड़े हुए।
छठ व्रतियों के इस महान पर्व को ध्यान में रखकर प्रशासन की ओर से शरीर के घाटों पर प्रकाश व सुरक्षा की व्यवस्था भी सुनिश्चित की गई अगले थी।घाट अंधेरा होने पर भी बिजली के प्रकाश में जगमगा रहे थे। छठ महापर्व के तीसरे दिन डूबते हुए सूर्य भगवान को अर्घ्य देने के लिए सज धज कर पूरी तैयारी के साथ लोगों का हुजूम नदी के विभिन्न तटों पर उमड़ा दिखाई दिया।अयोध्या में नया घाट से लेकर राजघाट तक और फैजाबाद में जमथरा घाट व गुप्तारघाट पर देर शाम तक मेले सा नजारा रहा।बडी संख्या में श्रद्धालुओं की आमदरफ्त के कारण अयोध्या में यातायात व्यवस्था ध्वस्त रही।लोगों को घण्टों जाम से जूझना पडा।
छठ व्रत की शुरुआत नहाए खाए के साथ सोमवार को हुई थी। इसके बाद मंगलवार को खरना की परंपरा निभाई गई।वही बुधवार की शाम डूबते सूर्य को अर्घ्य देने के बाद बृहस्पतिवार की प्रातः उगते सूर्य को अर्घ्य देने के साथ ही यह व्रत समाप्त हो जाएगा। डूबते सूर्य को अर्घ्य देने के लिए श्रद्धालुओं का समूह ढोल नगाड़े के साथ छठ मैया के गीत गाते हुए हर तरफ दिखाई दिया।
सूर्य भगवान की पूजा के लिए नए वस्त्र पहन कर बांस की टोकरी में फलों व गन्ने के साथ लोग उत्साह के साथ जाते दिखे। व्रतियों ने भगवान सूर्य को अर्घ्य और पूजन के बाद पुत्रों के सुखी और दीर्घ जीवन की कामना की। इन घाटों पर महापर्व संबंधी लोकगीतों का स्वर लगातार गूंजता रहा। यह व्रत पुत्र कामना की पूर्ति और उसके स्वस्थ सुखी दीर्घ जीवन के लिए किया जाता है। धीरे-धीरे इस पर्व का दायरा जिले के अन्य हिस्सों में भी बढ़ता जा रहा है। जिसका असर गोसाईगंज बीकापुर सोहावल आज क्षेत्रों में भी दिखाई दिया। इन क्षेत्रों में पडने वाले तालाब व नदियों के किनारे मेले सा नजारा रहा।

