आखिर सच्चा और झूठा कौन एसपी सुधीर कुमार सिंह या जितेंद्र सिंह कोतवाल जीयनपुर
पुलिस अपनी वाहवाही लूटने में मस्त।
जिले पुलिस महकमे के हेड का ब्यान गलत साबित होगा या जीयनपुर कोतवाल देखते है क्या होता है।
जीयनपुर कोतवाली में दुष्कर्म आरोपी गिरफ्तारी का मामला सामने नया मोड़ आया है।
रिपोर्ट: नीतीश जायसवाल आजमगढ़
आज़मगढ़: जीयनपुर कोतवाली के अजमतगढ़ रोड स्थित अमीना चाइल्ड केयर हॉस्पिटल में भर्ती एक महिला के साथ अस्पताल में तैनात कंपाउंडर द्वारा दुराचार की घटना को अंजाम दिए जाने के मामले में महिला के पति द्वारा उक्त कंपाउंडर के विरुद्ध लिखित तहरीर देकर दुराचार का मुकदमा दर्ज कराया गया था उक्त दुराचार राहुल पुत्र ओमप्रकाश निवासी अमुआरी नरायनपुर जहां पुलिस घटना के एक दिन बाद राइस मील चौराहे से शनिवार कि सुबह गिरफ्तार करने का दावा कर जेल भेज दी थी।
तो वही जीयनपुर कोतवाल द्वारा दिखाई गई गिरफ्तारी पुलिस कप्तान सुधीर कुमार सिंह उस बयान को झूठा साबित कर दिया है, जिसको दैनिक अखबारों ने प्रमुखता के साथ छापा है, जिसमें कहा गया है कि घटना के बाद कप्तान द्वारा आरोपी कंपाउंडर को हिरासत में लेकर पूछताछ की बात कही थी। कप्तान के बयान और पुलिसिया कहानी में जमीन और आसमान का अंतर है जो इस बात साबित करता है कि घटना के तुरंत बाद पुलिस ने उक्त कंपाउंडर हिरासत में ले लिया था जिस पर कप्तान द्वारा बयान भी जारी कर दिया गया था लेकिन एक दिन बाद राइस मिल चौराहे जीयनपुर पुलिस गिरफ्तारी दिखाना कितना सही है यदि वह घटना के दिन हिरासत था तो दूसरे दिन जीयनपुर कोतवाली के राइस मिल चौराहे पहुंचा कैसे जीयनपुर कोतवाल राइस मिल चौराहे से राहुल की गिरफ्तारी दिखाकर जनपद पुलिस के मुखिया के बयान को पूरी तरह झूठा साबित कर दीया जिसमें घटना के दिन राहुल को हिरासत में लिया जाना बताया गया पुलिस की इसी कार्य प्रणाली से न्यायालय से अपराधियों को लाभ मिल जाता है जब पुलिस गिरफ्तार कहीं और से करती है और अपने गुड वर्क के चक्कर में दिखाती कहीं और से इसका लाभ लेकर अपराधी न्यायालय से छूट जाते हैं तो वही पीड़ित को न्याय नहीं मिल पाता है ऐसी ही कार्यवाही पुलिसिंग व्यवस्था को सवालों के घेरे में लाकर खड़ी कर देती है।
इस मामले को देखकर क्षेत्र में तरह तरह के सवाल उठ रहे है।

