कब कदम उठा पाऊँगी?

कब कदम उठा पाऊँगी?

 

करिश्मा

उम्र – 20 वर्ष

कक्षा – BA

 

मैं भटक रही हूँ रातों में,

इन सोच को साथ लेकर,

क्यों यह बातें मुझे झकझोड़ रही हैं?

क्यों यह रूढ़िवादी सोच मुझे तोड़ रही हैं,

मैं इन सोचों से घबरा रही हूं,

रूढ़िवादी सोच की गलियों में भटकती जा रही हूं,

कब मैं खुल के जी पाऊंगी?

कब मैं इस दुनिया से लड़ पाऊंगी?

के कदम बड़ा उठा पाऊंगी,

कब अपने रास्ते खोल पाऊंगी।।

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