अयोध्या(डा.अजय तिवारी जिला संवाददाता)
जिला अस्पताल प्रशासन तो अस्पताल में लगभग सभी आवश्यक दवाओं की उपलब्धता का दावा कर रहा है,लेकिन कमीशनबाजी के चक्कर में डॉक्टर खुलेआम बाहर की दवाएं लिख रहे हैं।जिससे मरीज व उनके परिजनो का आर्थिक व शारीरिक शोषण हो रहा है।जब देश की उपासना हिंदी समाचार पत्र/ एनबीसी चैनल टीम ने शुक्रवार को जब जिला अस्पताल में मिल रही सेवाओं का जायजा लिया तो निशुल्क चिकित्सा व्यवस्था मुहैया कराने के दावों की पोल खुल गई।अस्पताल में यूं तो लगभग सभी आवश्यक दवाओं की उपलब्धता का दावा किया जा रहा है, लेकिन उसका लाभ मरीजों को नहीं मिल सका।वही ओपीडी में आने वाले अधिकांश मरीजों को पर्याप्त दवाएं न होने की बात कहकर बाहर से दवाएं मंगाई गईं।इसी की वजह से अस्पताल के बाहर स्थित मेडिकल स्टोर पर मरीजों का तांता दिखा। दवाएं खरीदकर लौटते समय मरीजों ने सिस्टम की नाकामियां बताते हुए व्यवस्था के प्रति आक्रोश भी जताया।हैदरगंज मुहल्ला निवासी सुफियान अहमद ने बताया कि पांच वर्षीय बेटे मो. रहमान के पेट दर्द होने पर जिला अस्पताल की ओपीडी के तीन नंबर कक्ष में दिखाया था।डॉक्टर ने अस्पताल में दवा मौजूद न होने की बात कहकर बाहर से दवा लिखी, जो 155 रुपये में मिली।अमावा सूफी निवासी रामनेवल का मरीज सर्जिकल वार्ड में भर्ती है।जिसका पथरी से संबंधित समस्या होने पर इलाज चल रहा है।रामनेवल ने बताया कि डॉक्टर ने एक पर्ची लिखकर बाहर से दवा मंगाई, जो 152 रुपये की मिली।हैदरगढ़ बाराबंकी निवासी रामलखन सिंह शहर में किराए पर मकान लेकर रहते हैं।पत्नी को कई दिनों से बुखार से आराम न होने पर जिला अस्पताल के 15 नंबर कक्ष में दिखाया। रामलखन सिंह ने बताया कि डॉक्टर ने जो दवाएं लिखा वह बाहर 465 रुपये की मिली।
जिला अस्पताल में वैसे तो मानक के अनुरूप करीब 290 प्रकार की दवाओं की उपलब्धता होनी चाहिए, लेकिन इन दिनों 140 प्रकार की जीवन रक्षक दवाएं उपलब्ध हैं।इनमें दर्द का ट्रामाडॉल इंजेक्शन, गैस का रेंटिडीन टेबलेट व इंजेक्शन, पेंटा प्रोजॉल, आई ड्रॉप सहित करीब छह-सात प्रकार की दवाओं की कमी है। हालांकि, इनके स्थान पर इन बीमारियों की दूसरी दवाओं की उपलब्धता का दावा किया जा रहा है।इस संबंध मे डॉ. सीबीएन त्रिपाठी, सीएमएस, जिला अस्पताल ने दावा किया कि जिला चिकित्सालय मे पर्याप्त दवाएं उपलब्ध हैं।इसके बावजूद भी यदि कोई चिकित्सक या कर्मचारी बाहर से दवाएं लिख रहा है तो यह दंडनीय है।मरीजों को इसकी शिकायत करना चाहिए।मेरा नंबर भी परिसर में कई जगह इसी उद्देश्य से चस्पा है। शिकायत मिलने पर संबंधित कर्मचारी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

