गणाधिपति गुरुदेव श्री तुलसी के 29 वें महाप्रयाण दिवस पर विशेष आलेख
ओम् गुरुदेवाय नमः !
आज से 28 वर्ष पूर्व तेरापंथ धर्म संघ के नवम अधिशास्ता , अणुव्रत को जन – जन तक पहुँचाने वाले संयम के सुमेरु आचार्य श्री तुलसी सदा – सदा के लिये इस धरा से विदा हो गये ।गुरुदेव तुलसी के चरणों में मेरा भावों से शत – शत वन्दन ! एवं इस अवसर पर मेरे भाव –
गुरु तुलसी को श्रद्धा से नमन करे हम ।
धर्म के प्रति आस्था को सुदृढ़ करे हम ।
गुरुदेव के गौरव को शिखरों चढ़ाएँ हम ।
संघ को शिखरों चढाएँ हम ।
तुलसी गुरु को ध्यायें हम ।
तुलसी गुरु का धर्म क्रान्ति का सूत्र अनूठा ।
हम सबने उसको पहचाना ।
अन्धाग्रह को छोड़ सनातन ।
सत्य तत्व को हमने जाना ।
क्षीर – नीर – निर्णायक ।
मन को हँस बनाएं हम ।
नैतिकता को जीवन का आधार बनाया ।
अणुव्रत के छोटे – छोटे संकल्पों को बताया ।
जन – जन को धार्मिकता का बोध दिया ।
बढ़ती हुई विषमता में भी ।
समता को बसाने का बोध दिया ।
शास्त्रों के उच्चारण से धार्मिकता का बोध दिया ।
धर्म के मर्म को समझा अर्हता का मार्ग बताया ।
तदनुसार व्यवहार – दिशा जग दिखलाई ।
धर्म नहीं चिंता करता ।
परलोक बने सुखदाईं।
उसको चिन्ता जीवन में लाकर ।
हमारे में कितनी पवित्रता आई ।
यही घोष अध्यात्मवाद का ।
गुरु तुलसी ने हमको सुनाया ।
प्रदीप छाजेड़
( बोरावड़ )

