गोंडा राजापुर को तुलसी जन्म स्थली घोषित करने की मांग को लेकर मुख्यमंत्री को स्वामी भगवदाचार्य ने दिया ज्ञापन

आर एल पाण्डेय

लखनऊ। श्री तुलसी जन्मभूमि राजापुर सुकरखेत तहसील करनैलगंज, विकास खण्ड परसपुर जनपद-गोण्डा को गोस्वामी तुलसीदास जन्म स्थली घोषित करने एवं पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने के सम्बन्ध में मुख्यमंत्री को ज्ञापन दिया गया है। श्री रामचरितमानस के रचयिता गोस्वामी तुलसीदास की जन्मभूमि राजापुर सूकरखेत जनपद-गोण्डा का विवाद लगभग 500 वर्षों से चला आ रहा है। सन्त महापुरुषों एवं सिद्धों की यह परम्परा रही है कि वे लोग सदैव आत्म विज्ञान से दूर रहे उन्होंने अपने लिए कुछ नहीं लिखा है। गोस्वामी श्री तुलसीदास जी भी उन्हीं श्रृंखला के महाकवि हैं। डॉ० ग्रियर्सन ने अपने शोध निबन्ध हिन्दुस्तान का मध्यकालीन साहित्य में उल्लेख किया है कि गौतम बुद्ध के बाद उत्तरी भारत के सबसे बड़े लोकनायक तुलसीदास थे। श्री रामचरितमानस जैसा विश्व प्रसिद्ध महाकाव्य को इस महान संत ने समाज को प्रदान किया ऐसे मानसकार तुलसी के सम्बन्ध में जानकारी प्राप्त करना बुद्धिजीवियों का नैतिक दायित्व है। तुलसी जन्मभूमि के सम्बन्ध में तीन प्रमुख स्थान है। राजापुर सूकरखेत गोण्डा, राजापुर (चित्रकूट) और सोरो (एटा) आचार्य रामचन्द्र शुक्ल ने तुलसी की जन्मभूमि की चर्चा के बीच सोरों की प्रमाणिकता का उच्छेदन करते हुए लिखा है। कुछ लोग गोस्वामी जी का जन्मस्थान ढूँढते एटा जिले के “सोरी” नामक स्थान तक दौड़े हैं। पहले पहल उस ओर इशारा स्व० लाला सीताराम ने किया था। उसके बहुत दिनों पीछे उसी इशारे पर दौड़ लगी और अनेक कथित प्रमाण सोरों को जन्मस्थान सिद्ध करने के लिए तैयार किये गये जो वास्तविकता से दूर थे। “सारे उपद्रव की जब है ‘सूकरखेत जो भ्रम से सोरों समझ लिया गया है। सूकरखेत गोण्डा जिले में सरयू के किनारे एक पवित्र तीर्थ है, जहां आसपास के कई जिले के लोग स्नान करने आते हैं और मेला लगता है।” हिन्दी साहित्य का इतिहास, आचार्य रामचन्द्र शुक्लआलसी अमागे मोसे हैं कृपालु पाले पोसे। राजा मेरे राजाराम अवध सहरू है।

विनयपत्रिका 250 संलग्नक-26 गोस्वामी जी कहते हैं कि मेरे राजाराम और मेरा शहर अवय है। गोस्वामी तुलसीदास के समय गोण्डा जिले का अलग अस्तित्व नहीं था। गोण्डा अवध के अन्तर्गत था। बाद में गोण्डा जिला का निर्माण हुआ था। राजापुर सूकरखेत पसका आदि स्थान अयोध्या के 84 कोसी परिक्रमा के अन्तर्गत आज भी विद्यमान है। सरयू के किनारे तुलसी जन्मभूमि राजापुर से पांच किमी दक्षिण तरफ तुलसी की गुरुभूमि नरहरि आश्रम सरयू- घाघरा-संगम पसका सूकरखेत में स्थित है। वहीं पर वाराह भगवान का मन्दिर तथा पूर्व में 8 किमी० दूरी पर वाराही देवी का मन्दिर स्थित है। गोस्वामी जी ने संकेत किया है कि प्रभु आपका जो गोत्र है वही मेरा भी गोत्र है।

साह ही को गोतु गोतु होत है गुलाम को
कवितावली 107 उत्तर काण्ड संलग्नक-27 भगवान श्रीराम का गोत्र भारद्वाज गोत्र है और गोस्वामी तुलसीदास के वंशजों (दुबे परिवार) का गोत्र भी भारद्वाज गोत्र है। अर्थात् में आपकी जन्मभूमि अयोध्या से हर प्रकार से सम्बन्धित रहा हूँ। उन्होंने कवितावली में कहा है कि अगर आपने किष्किन्धा से सुग्रीव और लंका से विभीषण का उद्धार किया तो मैं आपके घर का पैदा हुआ हूँ।
बानर-विभीषण की ओर के कनावड़े हैं,
तो प्रसगु सुने अगुजरे अनुचर को
सखे रीति आपनी जो होइ सोई की बलि
तुलसी तिहारो घर जायऊ है घर को
कवितावली उत्तरकाण्ड-122. संलग्नक-28
दुतिय बास अघ नास किय पावन सूकरखेत।
त्रै योजन जो अवध ते दास दरस सुष हेत।
तुलसीदास एक प्रामाणिक सर्वेक्षण संलग्नक-29
तुलसीदास एक प्रामाणिक सर्वेक्षण श्री केपी श्रीवास्तव आई०ए०एस० (से०नि०) इस प्रकार गोस्वामी जी में अपने आत्मकथ्य में अपनी जन्मभूमि का विधिवत संकेत किया है। पूर्व का अयोध्या वर्तमान जनपद गोण्डा का राजापुर सूकरखेत जनपद गोण्डा जो अयोध्या के समीप राजापुर सुकरखेत गोण्डा को तुलसी का प्रमाणिक जन्मभूमि विद्वानों ने
स्वीकार किया। गोस्वामी जी का आत्मकथ्य सबसे बड़ा प्रमाण है। “मैं पुनि निज गुरू सन सुनी कथा सो सूकरखेत । समुझी नहि तसि बाल पन तब अति रहेयो अचेत। श्री रामचरित मानस, बालकाण्ड 30 (क) संलग्नक-2 गोस्वामी तुलसीदास जी ने सूकरखेत में अपने गुरु नरहरिदास से रामकथा श्रवण किया था परन्तु अचेतावस्था के कारण बालपन में पूरा मर्म नहीं समझ सके थे। सूकरखेत सरयू- घाघरा संगम पसका गोण्डा में स्थित है।
कहत कथा इतिहास बहु आये सूकरखेत। संगम सरजू घाघरा संत जनन सुख देत
योजन है अवध के पसका सो परमान अयोध्या से पश्चिमोत्तर सूकरखेत गोण्डा जनपद में स्थित है जहाँ प्रतिवर्ष पौष मास में प्रयागराज की तरह एक माह का सूकरखेत मेला सतयुग से चला आ रहा है। सुकरखेत अयोध्या से उत्तर-पश्चिम गोण्डा जिले में सरयू घाघरा के संगम पसका के निकट माना गया है। सतयुग में भगवान वाराह अपने शक्ति वाराही देवी के साथ सूकर का अवतार धारण कर हिरण्याक्ष का वध करके पृथ्वी का उद्धार किया था। वाराह पशु अवतार लेने से यह स्थान पशुका कालान्तर में पसका के रूप में चरित्रार्थ हुआ। अयोध्या से पश्चिमोत्तर 36 किमी० दूरी पर स्थित पसका सूकर खेत है। गोण्डा जिले के करनैलगंज तहसील में सूकरखेत स्थित सरयू तट पर राजापुर गांव तुलसी की। जन्मभूमि है।तुलसी-जन्मभूमि, प्रो० सूर्य प्रसाद दीक्षित.. संलग्नक-3 राजापुर चित्रकूट तुलसी जन्मभूमि के रूप में विद्वानों के लिए चर्चित रहा है। आपको विदित हो कि राजापुर सरजू के तीरा को राजापुर जमुना के तीरा कराया गया तथा बेनी माधवदास के गोसाई चरित को परिवर्तन एवं परिवर्धन करके मूल गोसाई चरित के रूप में प्रस्तुत किया गया। दूबन का पुरवा, राजापुर और रजियापुर एक ही है इसका एक प्राचीन नाम विक्रमपुर है। संवत् 1913 में हिन्दू पत ने इसका नाम राजापुर रख दिया था। इस नाम का कोई सम्बन्ध राजा साधू से नहीं है।
तुलसी जन्मभूमि प्रो० सूर्य प्रसाद दीक्षित ने पृष्ठ 7 में दर्शाया गया है। अयोध्या की 84 कोसी परिक्रमा में आज भी सम्मिलित है, गोस्वामी तुलसी दास की जन्मभूमि है।अतएव आपसे सादर अनुरोध है कि रामचरित मानस के रचयिता गोस्वामी तुलसी दास की जन्मभूमि अयोध्या के समीप राजापुर सूकरखेत गोण्डा को पर्यटन स्थली घोषित करने की कृपा करें। आज जबकि गोस्वामी जी के आराध्य भगवान श्री राम पावन जन्मभूमि अयोध्या का विकास किया जा रहा है ऐसी स्थिति में श्रीराम के अनन्य भक्त गोस्वामी तुलसीदास जी की जन्मभूमि का विकास भी अत्यन्त अपेक्षित है। सम्पूर्ण विश्व में उस राष्ट्र के साहित्यकारों की जन्मभूमि को वहां की सरकार द्वारा विकसित किया गया है। इंग्लैण्ड में शेक्सपियर, रूस में टालस्टाय और जर्मनी में गेटे की जन्मभूमि को वहां की सरकारों ने गरिमामण्डित किया है। उपरोक्त विवेचन से स्पष्ट है कि राजापुर सूकरखेत गोण्डा को गोस्वामी तुलसीदास जी की जन्म स्थली घोषित करते हुए पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की कृपा करें। महती कृपा होगी। उक्त जानकारी सनातन धर्म परिषद के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ० स्वामी भगवदाचार्य ने दी।

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