डॉ. रणजीत सिंह ( कवि वीर रस , प्रतापगढ़) द्वारा प्रस्तुत काव्य “वतन किस हाल में होगा यही चिंता सताती है

डॉ. रणजीत सिंह ( कवि वीर रस , प्रतापगढ़) द्वारा प्रस्तुत काव्य “वतन किस हाल में होगा यही चिंता सताती है, मुझे एक बार फिर सरहद से मेरी माँ बुलाती है”: अखिल भारतीय कवि सम्मेलन एवं मुशायरा’ में उमड़ा भावों का सैलाब

 

सिटी रिर्पोटर अनुराग श्रीवास्तव

 

जौनपुर, 28 फरवरी 2026: जनपद के ग्राम्या के 45वें वर्ष के गौरवशाली उपलक्ष्य में विगत रात 28 फरवरी को एक भव्य ‘अखिल भारतीय कवि सम्मेलन एवं मुशायरा’ का आयोजन कुशलतापूर्वक संपन्न हुआ। इस ऐतिहासिक महफिल ने जौनपुर की शाम को काव्यमयी रसों और वैचारिक तरंगों से सराबोर कर दिया।

कुशल संयोजन और दिव्य शुभारंभ

एवं संयोजन प्रख्यात साहित्यकार सतीश चंद्र शुक्ल ‘सत्यथी’ और सह-संयोजक आदर्श कुमार (संपादक, तरुणमित्र) के कुशल नेतृत्व में हुआ। और कार्यक्रम का सफल संचालन गैबी जौनपुरी के नेतृत्व में , अध्यक्ष सभाजीत द्विवेदी ( प्रखर) ने किया

समारोह का शुभारंभ माँ सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण के साथ हुआ। कार्यक्रम की शुरुआत प्रतापगढ़ की बिटिया जया मिश्रा द्वारा प्रस्तुत सुमधुर सरस्वती वंदना से हुई, जिनके स्वरों ने पूरे वातावरण में दिव्यता घोल दी। अतिथियों का स्वागत करते हुए आयोजकों ने जनपद के गौरवशाली साहित्यिक इतिहास को रेखांकित किया।

कवियों की ओजस्वी वाणी से गूंजा पंडाल

मंच पर जब देश के चुनिंदा रचनाकारों ने अपनी पंक्तियाँ पढ़ीं, तो श्रोताओं का उत्साह देखते ही बनता था। कवियों का क्रम और उनकी प्रमुख पंक्तियाँ कुछ इस प्रकार रहीं:

* बिहारी लाल अम्बर (प्रयागराज): मुख्य कवि के रूप में उन्होंने व्यवस्था पर तीखा प्रहार किया—

> “जो भी शराब के विरोध में बोला, उसी की जेब से पौवा निकला।”

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* डॉ. रणजीत सिंह (वीर रस, प्रतापगढ़): अपनी ओजस्वी वाणी से राष्ट्रभक्ति का अलख जगाते हुए पढ़ा—

> “वतन किस हाल में होगा यही चिंता सताती है, मुझे एक बार फिर सरहद से मेरी माँ बुलाती है।”

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* डॉ. विभा तिवारी: दुनिया के दोहरे व्यवहार और फितरत पर वार करते हुए कहा—

> “जाल फेंकेंगे दाना बिखेरेंगे ये, फिर परिंदों के पर ये कतर जाएंगे।”

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* सुमित शिवम मौर्य (जौनपुर): अपनी मर्मस्पर्शी पंक्तियों से सबका दिल जीता—

> “उड़ती चिड़ियों के परों को नोचने वाले, दर्द कहाँ से समझेंगे दिलों से खेलने वाले।”

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* अतुल बाजपेई (लखनऊ): प्रभु राम की महिमा का बखान करते हुए पढ़ा—

> “बल, बुद्धि, पराक्रम के सागर, जिनके आयुध धनु-सायक हैं। वह पुरुषोत्तम, भारत गौरव, प्रभु राम हमारे नायक हैं।”

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* संदीप सरगम: सामाजिक विडंबनाओं को व्यंग्य के रूप में पिरोते हुए पढ़ा—

> “काश हम भी होते लड़की हसीन, फिर जुर्म चाहे जितने भी करते संगीन, फिर भी सभी होते मेरे शौकीन।”

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* हरिंदर ‘ज़ख्मी’: वतन के प्रति अटूट निष्ठा का संदेश देते हुए समापन की ओर पढ़ा—

> “वतन के साथ गद्दारी हमें अच्छी नहीं लगती, करो दुश्मन से तुम यारी हमें अच्छी नहीं लगती।”

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आमंत्रित साहित्यकारों की उपस्थिति

इस शाम को भव्य बनाने में अहमद निसार, सुशील दूबे, प्रीति श्रीवास्तव, डण्डा बनारसी (वाराणसी), अंबुज मिश्र, प्रशांत मिश्रा, डॉ. संजय सिंह सागर, राजेश पांडेय एडवोकेट, राजेश चौबे ‘दादा’, गैबी जौनपुरी, डॉ. प्रमोद वाचस्पति, बेहोश जौनपुरी, शंकर आनंद, शिव प्रकाश साहित्य और प्रमोद मिश्रा जैसे दिग्गजों ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।

प्रशासनिक गौरव का सम्मान

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि ध्रुव खड़िया (IAS 2021/CDO जौनपुर) और ए.डी.एम. (वित्त एवं राजस्व) परमानंद झा सहित कई प्रशासनिक अधिकारियों को उनकी विशिष्ट सेवाओं के लिए सम्मानित किया जाना था परन्तु प्रशासनिक व्यवस्था के कारण वह लोग उपलब्ध नहीं हो पाये अधिकारियों की आश्वावशन के बाद उपलब्ध न हो पाना भी एक सामाजिक उदासीनता का कारण है सह-संयोजक आदर्श कुमार ने सभी आगंतुकों का आभार व्यक्त किया।

देर रात तक चले इस सम्मेलन ने एक बार फिर सिद्ध कर दिया कि जौनपुर न केवल इतिहास की नगरी है, बल्कि यह साहित्य और संवेदनाओं की अत्यंत उर्वरा भूमि भी है। अन्त में आयोजक द्वय सतीश चन्द्र शुक्ल सत्पथी व आदर्श कुमार ने आये हुए अतिथियों का आभार प्रकट करते हुए अगले वर्ष तक के लिए समापन की घोषणा किया ।

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