ताइवान को कई देशों का साथ, जंग के खतरनाक अंजाम की आशंका के बीच ड्रैगन को संयम की सलाह

यूक्रेन व रूस के बीच छह माह से जारी जंग के बाद अब ताइवान और चीन के बीच सैन्य टकराव की आशंका गहराती जा रही है। ताइवान को विश्व के कई देशों का समर्थन मिल रहा है और चीन व रूस की दोस्ती भी किसी से छिपी नहीं है। ऐसे में अमेरिकी स्पीकर नैंसी पेलोसी की ताइवान यात्रा के बाद उभरा ताइवान संकट युद्ध के मुहाने पर पहुंच चुका है। ताइवान के प्रति बढ़ते समर्थन के साथ ही आसियान देशों ने चीन से अधिकतम संयम बरतने की अपील की है, क्योंकि सैन्य टकराव का भयावह अंजाम हो सकता है।

पॉलिसी रिसर्च ग्रुप ने चीन व ताइवान के साथ पूरी दुनिया को चेताया है कि ताइवान-चीन जंग हुई तो इसके खतरनाक नतीजे आएंगे। दुनिया यूक्रेन जंग के बाद एक और जंग नहीं देखना चाहती है। यदि चीन ने ताइवान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की तो उसका बुरा अंजाम होगा। कई देशों ने ताइवान का समर्थन किया है, लेकिन वे यूक्रेन की तरह एक और जंग नहीं चाहते हैं।

आसियान देशों ने ताइवान की खाड़ी में बढ़ते तनाव को लेकर आगाह करते हुए चिंता जताई है। पॉलिसी रिसर्च ग्रुप ने 27 देशों के संगठन आसियान की बैठक के बाद यह बात कही। चीन भी आसियान का हिस्सा है। इन देशों ने चीन से कहा कि जंग के अकल्पनीय अंजाम होंगे, इसलिए वह अधिकतम संयम बरते।

आसियान की प्रतिक्रिया से चीन हैरान
रिपोर्ट के अनुसार आसियान की इस अप्रत्याशित प्रतिक्रिया ने चीन के विदेश मंत्री को बैठक से बाहर जाने पर मजबूर कर दिया। यहां तक कि दक्षिण कोरिया, जो सीधे तौर पर चीन को दोष देने से दूर रहता है, ने भी ताइवान में यथास्थिति को बलपूर्वक बदलने के किसी भी प्रयास पर आपत्ति जताई।

इन देशों ने छोड़ा चीन का साथ
पूर्वी यूरोप सहित कई देश चीन के साथ अपने संबंधों को सीमित करना चाह रहे हैं। ताइवान को चीन द्वारा सैन्य खतरों और बीजिंग और मॉस्को की बढ़ती दोस्ती के मद्देनजर एस्टोनिया और लातविया ने चीन के नेतृत्व वाले सहयोग मंच को छोड़ दिया। ग्रुप के अनुसार लातविया के विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि उसने मध्य और पूर्वी यूरोपीय देशों और चीन के सहयोग संगठन में अपनी भागीदारी को समाप्त करने का फैसला किया है। लिथुआनिया ने भी पिछले साल चीन के नेतृत्व वाले समूह को छोड़ दिया था क्योंकि उसने लोकतांत्रिक ताइवान के साथ संबंधों को बढ़ावा देने की मांग की थी। अन्य यूरोपीय देश जैसे स्लोवाकिया और चेक गणराज्य चीन की चेतावनियों की अनदेखी करते हुए ताइवान के साथ अपने संबंधों को मजबूत कर रहे हैं।

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