
टूर ऑफ ड्यूटी क्या है?
इसकी शुरुआत द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान हुई थी। तब ब्रिटेन में पायलट की कमी पड़ गई थी। ब्रिटिश सरकार ने उस दौरान टूर ऑफ ड्यूटी की शुरुआत की थी। इसके तहत युवाओं को एक निश्चित और सीमित समय के लिए वायुसेना में शामिल किया गया था।
उस वक्त शर्त रखी गई थी कि हर पायलट को दो साल में करीब 200 घंटे विमान उड़ाना है। ये प्रक्रिया सफल रही। इसके बाद कई देशों ने अपने यहां टूर ऑफ ड्यूटी अनिवार्य कर दिया। इसका मकसद ये है कि देश के ज्यादा से ज्यादा नौजवानों को सेना की ट्रेनिंग मिल सके। ताकि जरूरत पड़ने पर युवा देश की सेवा कर सकें।
दुनिया के किन-किन देशों में टूर ऑफ ड्यूटी का नियम है?
दुनिया में 30 से ज्यादा देश ऐसे हैं, जहां किसी न किसी तरह से टूर ऑफ ड्यूटी को लागू किया गया है। इनमें 10 देश ऐसे हैं, जहां पुरुष और महिलाओं दोनों को सेना में अनिवार्य रूप से सेवा देनी पड़ती है। इनमें चीन, इस्राइल, स्वीडन, यूक्रेन, नॉर्वे, उत्तर कोरिया, मोरक्को, केप वर्दे, चाड, इरित्रिया जैसे देश शामिल हैं।

