
अयोध्या। सरकारी तंत्र में पुलिस विभाग की भी एक अहम् भूमिका होती है।इस विभाग के अधिकारी व कर्मी के कंधो के ऊपर ही देश के अंदर के लोगों का सुरक्षा,समाज में कानून व्यवस्था लागू करना व फरियादियो को त्वरित न्याय प्रदान करने का दायित्व होता है।इतनी सब जिम्मेदारी होने के बाद भी अगर कोई आईपीएस अधिकारी समाज सेवा,कोविड काल में मरीजो की जान की रक्षा करना के साथ साथ आध्यात्म से जुड़े रहना अपने आप में बहुत ही सराहनीय कार्य है।जी हाँ हम बात कर रहे हैं वर्ष 1998 बैच के पीपीएस व वर्ष 2010 के आईपीएस कैडर के अधिकारी कानपुर देहात के मूल निवासी डॉ राजीव नारायण मिश्र जी की।मालूम हो कि आईपीएस अधिकारी डॉ राजीव नारायण मिश्र 2010 की तैनाती प्रदेश के एसटीएफ विभाग में एसपी के रूप में हुई।जिसका दायित्व उन्होंने बखूबी कर्तव्य निष्ठा के साथ निभाया।वही इस दौरान उन्होंने कई ऐसे कारनामे भी किए जिसके चलते उन्हें राष्ट्रपति,राज्यपाल,पुलिस महानिदेशक द्वारा कई पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है।इस दौरान उन्होंने गाजियाबाद में बहुचर्चित एचसीएल इंजीनियर के अपहरण की गुत्थी को सुलझाने का काम किया वहीं दूसरी तरफ जब वे वर्ष 2002 से 2006 तक अति संवेदनशील जिला अयोध्या जनपद में सीओ सिटी के रूप में अपने कर्तव्य के दायित्व का निर्वहन कर रहे थे।उस समय राम नगरी अयोध्या में एक ऐसी घटना घटी जिसे आज तक अयोध्या जनपद के लोग नहीं भूल पा रहे हैं।हम बात कर रहे हैं 5 जुलाई वर्ष 2005 को सुबह 9:00 बजे उस समय जब चौका देने वाली खबर आई थी कि एक वाहन से भारी मात्रा में राकेट लांचर, हैंड ग्रेनेड व भारी मात्रा में विस्फोटक पदार्थों के साथ पांच आतंकवादी राम जन्मभूमि परिसर की ओर जा रहे थे जैसे ही इनको सूचना मिली तो उन्होंने अपने जनक एक कार्बाइन लेकर खुद सेनानायक के रूप में घटनास्थल पर पहुंचकर सीआरपीएफ पीएसी व नागरिक पुलिस की संयुक्त टीम के साथ मिलकर उन पांचों आतंकवादियो को अपनी सूझबूझ व सीआरपीएफ,पीएसी व नागरिक पुलिस की संयुक्त टीम के सहयोग से कड़ी मुठभेड़ में मार गिराया।उनके जिससे अयोध्या में एक बड़ी अनहोनी घटना होने से बचा लिया।इसके लिए अभी तक आईपीएस अधिकारी डाक्टर मिश्र की तारीफ़ अयोध्या जिले की जनता करती है।देश की उपासना हिंदी समाचार पत्र अयोध्या ब्यूरो चीफ राजेश श्रीवास्तव से खास बातचीत में उन्होने बताया कि इसी तरह की एक गुत्थी उन्होने तब सुलझाने का कार्य किया जब वे एस पी एसटीएफ थे तब उस समय एक एचसीएल इंजीनियर के अपहरण की गुत्थी भी उन्होंने सुलझाए थे खास मुलाकात में उन्होंने यह भी बताया कि कोविड-19 काल में उन्होंने व उनके टीम के माध्यम से लोगों की काफी मदद पहुंचाई गई साथ ही साथ 34 वीं बटालियन कंपनी मे हॉस्पिटल की व्यवस्थाओ भी मुहैया कराया गया और इसके साथ स इस पीएसी कैंप में संचालित जो एंबुलेंस की व्यवस्थाएं थी उससे भी लोगों को काफी राहत पहुंचाया गया मालूम हो कि आईपीएस डॉ राजीव नारायण मिश्र के कार्य कुशलता को देखते हुए शासन ने उन्हें लगातार दो बार से प्रयागराज में होने वाले कुंभ मेले का दायित्व सौंप रही है जिसे वे अपनी सूझबूझ व टीम के द्वारा बखूबी ढंग से संपन्न कराते हुए नजर आए इनके लिए सबसे बड़ी चुनौती दूसरे को रोना का ले रही जब उनको प्रयागराज में होने वाले कुंभ स्नान को लेकर था फिर भी उन्होंने अपनी सूझबूझ से इस पर्व को भी बखूबी संपन्न कराया इसी तरह इनका जहां एक तरफ पुलिसिंग व्यवस्था के साथ-साथ लोगों की सेवा की तरफ से भावना रहती है वहीं दूसरी तरफ वह अपने व्यस्ततम समय में कुछ समय निकालकर आध्यात्मिक की तरफ भी लगाते हैं मालूम हो कि वे इस समय कानपुर देहात के मूल निवासी 34 वीं बटालियन पीएसी वाराणसी के कमांडेंट के रूप में तैनात है।जो अपनी सेवा 34 वी बटालियन पीएसी में दे रहे हैं।मालूम हो कि कमांडेंट डाक्टर मिश्र इससे पहले प्रोफेसर,मध्य प्रदेश में पीसीएस सेवा मे अपना योगदान दे चुके है।

