प्रदर्शनकारियों पर हुए घातक हमले के मामले में महिंदा राजपक्षे होंगे तलब : मानवाधिकार आयोग

Mahinda Rajpaksa

पिछले महीने शांतिपूर्ण सरकार विरोधी प्रदर्शनकारियों पर हुए घातक हमले के संबंध में पुलिस और जेलकर्मियों का बयान लेने के बाद श्रीलंका के शीर्ष मानवाधिकार निकाय ने पूर्व प्रधानमंत्री महिंदा राजपक्षे को तलब करने में देरी करने और उन्हें पेश होने के लिए कहने का फैसला किया है। बुधवार को एक मीडिया रिपोर्ट के हवाले से यह जानकारी सामने आई। 9 मई को श्रीलंका में 76 वर्षीय पूर्व प्रधानमंत्री महिंदा के समर्थकों द्वारा देश के सबसे खराब आर्थिक संकट को लेकर उन्हें हटाने की मांग करने वाले शांतिपूर्ण सरकार विरोधी प्रदर्शनकारियों पर हमला करने के बाद हिंसा भड़क उठी थी। कोलंबो और अन्य शहरों में हुई हिंसा में नौ लोगों की मौत हो गई और 200 से अधिक लोग घायल हो गए थे।

राजपक्षे को तलब करने का फैसला
एक ऑनलाइन समाचार पोर्टल न्यूज फर्स्ट ने कहा कि श्रीलंका के मानवाधिकार आयोग (एचआरसीएसएल) ने पहले बुधवार को राजपक्षे को तलब करने का फैसला किया था। हालांकि, राजपक्षे को तलब नहीं किया जा सका क्योंकि घटना पर सभी पुलिस अधिकारियों और जेल विभाग के अधिकारियों से बयान नहीं मिल सके थे। अब 9 मई को प्रदर्शनकारियों पर हमले को लेकर इन अधिकारियों से बयान प्राप्त करने के बाद राजपक्षे को तलब करने का फैसला किया गया है। इसके अलावा एचआरसीएसएल ने कहा कि पीड़ितों के और बयान दर्ज किए जाएंगे। इसके बाद घटना के संबंध में महिंदा राजपक्षे और अन्य नेताओं के बयान लिए जाएंगे।

देश के इतिहास में श्रीलंका अब तक के सबसे खराब आर्थिक संकट से जूझ रहा है। श्रीलंका में कर्ज में डूबी अर्थव्यवस्था को संभालने के सरकार के खिलाफ बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। 1948 में ब्रिटेन से आजादी के बाद से 2.2 करोड़ लोगों का देश अभूतपूर्व आर्थिक उथल-पुथल से जूझ रहा है। देश में विदेशी मुद्रा की भारी कमी हो गई है, जिसका अर्थ है कि देश मुख्य खाद्य पदार्थों और ईंधन के आयात के लिए भुगतान नहीं कर पा रहा है और रोजमर्रा की चीजों के दाम आसमान पर पहुंच गए हैं।

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