प्रदेश में बाढ़ आपदा के प्रति 44 अतिसंवेदनशील एवं संवेदनशील जनपदों में बाढ़ आपदा पर राज्य स्तरीय मॉक एक्सरसाइज का आयोजन 25 जुलाई को

प्रदेश में बाढ़ आपदा के प्रति 44 अतिसंवेदनशील एवं संवेदनशील जनपदों में बाढ़ आपदा पर राज्य स्तरीय मॉक एक्सरसाइज का आयोजन 25 जुलाई को

मॉक एक्सरसाइज के द्वितीय चरण में टेबल टॉप एक्सरसाइज योजना भवन में आयोजित

ब्यूरो चीफ आर एल पांडेय

लखनऊः राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, भारत सरकार एवं उत्तर प्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के समन्वय से प्रदेश में बाढ़ आपदा के प्रति 44 अतिसंवेदनशील एवं संवेदनशील जनपदों में बाढ़ आपदा पर राज्य स्तरीय मॉक एक्सरसाइज का आयोजन 25 जुलाई, 2024 को किया जाना प्रस्तावित है। मॉक एक्सरसाइज़ के द्वितीय चरण में आज टेबल टॉप एक्सरसाइज बैठक का आयोजन योजना भवन के सभागार में किया गया।
राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के सदस्य, ले. जनरल सय्यद अता हसनैन ने कहा कि वर्तमान समय में उत्तर प्रदेश के कुछ जनपदो में बाढ़ की स्थिति है। इसके लिए किये जा रहे राहत एवं बचाव कार्यों को मॉक एक्सरसाइज़ के आयोजन के समय एन0डी0एम द्वारा समीक्षा की जाएगी। जिन जनपदों में अभी बाढ़ कि स्थिति नहीं है, वहाँ सम्बन्धित जिलों को अपने आपदा प्रबंधन योजना एवं बाढ़ योजना की समीक्षा में सहायता मिलेगी। सभी विभाग, भारतीय सेना, भारतीय वायु सेना, एन०डी०आर०एफ० एस0डी0आर0एफ0 तथा स्थानीय प्रशासन के बीच समन्वय बनाने में सहायक होंगे।
बैठक को संबोधित करते हुए उपाध्यक्ष, ले. जनरल योगेन्द्र डिमरी ने कहा कि राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण द्वारा विगत वर्षों से बाढ़ आपदा प्रबंधन को सुदृढ़ करने हेतु जनपदों के साथ मॉक एक्सरसाइज कराया जाता है जिसके माध्यम से राज्य स्तर पर प्रत्येक विभाग और उसके जिलों की आपदा प्रबंधन योजना की समीक्षा की जाती है तथा जिले में आपातकालीन सहायता कार्यों के बीच समन्वय का निरीक्षण किया जाता है। उन्होंने बताया कि एन0जी0ओ0, समुदाय और मीडिया को शामिल करके व्यापक रूप से आम जनमानस में जनजागरूकता की कार्यवाही की जाती है तथा यदि संसाधनों, जनशक्ति, संचार, प्रतिक्रिया क्षमताओं आदि में कोई अंतराल हो तो उसकी पहचान कर उसे मजबूत करने में इस प्रकार के मॉक एक्सरसाइज से सहायता भी मिलती है।
सचिव राजस्व एवं राहत आयुक्त, श्री जी० एस० नवीन कुमार ने कहा कि इस वर्ष पूर्व से ही संवेदनशील जनपदों में राहत एवं बचाव कार्य हेतु एन०डी०आर०एफ०, एस०डी०आर०एफ० एवं पी०ए०सी० की टीमें तैनात कर दी गयी थीं। जनपदों को समय-समय पर नदियों के जल स्तर की पूर्व चेतावनी भी प्रेषित की जा रही थी जिस कारण बाढ़ के दौरान विभागों का बेहतर समन्वय रहा एवं बाढ़ प्रबंधन का कार्य सुचारु रूप से किया जा सका।
कार्यशाला में राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, नई दिल्ली, भारत सरकार, ले. जनरल सय्यद अता हसनैन पी0वी0एस0एम0 यू0वाई0एस0एम0 ए0वी0एस0एम, एस0एम0 वी0एस0एम0 और बार (से.नि.) तथा उत्तर प्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के उपाध्यक्ष लेफ्टिनेंट जनरल योगेंद्र डिमरी, पी.वी.एस.एम, ए.वी.एस.एम, वी.एस.एम,(से.नि.) की अध्यक्षता में राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, भारतीय सेना, भारतीय वायु सेना, राजस्व विभाग, एन०डी० आर०एफ०,एस०डी०आर०एफ०, पुलिस, अग्निशमन, कृषि, सिंचाई एवं जल संसाधन, चिकित्सा एवं स्वास्थ,पंचायती राज, खाद्य एवं रसद,परिवहन, ऊर्जा, नागरिक सुरक्षा, दूरसंचार, ग्राम्य विकास, पशु पालन एवं लोक निर्माण विभाग, केन्द्रीय जल आयोग, मौसम विभाग, भारतीय रेलवे, इन्टर एजेंसी ग्रुप उ०प्र० के साथ राज्य स्तरीय अधिकारी तथा सम्बन्धित जिलों के जिलाधिकारी, अपर जिलाधिकारी(वि०/रा०) एवं अन्य जनपद स्तरीय अधिकारियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से समन्वय स्थापित किया गया।
बैठक एवं कार्यशाला में प्राधिकरण के अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी/विशेष सचिव, राजस्व विभाग, श्री राम केवल तथा उ0प्र0 राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकारण के सभी अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।

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