गोरखपुर, गड्ढों का फोरलेन बन गया है बस्ती-अयोध्या हाईवे। 80 किमी के इस मार्ग पर 500 से अधिक गड्ढे हैं। सुरक्षित सफर का स्लोगन यहां बेमानी है। फोरलेन की खराबी को लेकर एनएचएआइ (नेशनल हाईवे अथार्टी आफ इंडिया) के प्रोजेक्ट डायरेक्टर ने टोल कंपनी के अधिकारियों से नाराजगी जताई है।
हाईवे किनारे बालू-मोरंग की दुकानें बन रहीं हादसे का कारण;
हाईवे पर जहां-तहां खड़ी होती ट्रकें, विचरण करते बेसहारा पशु और हाईवे किनारे सजी बालू-मोरंग की दुकानें हादसे के कारण बन रहे हैं। विक्रमजोत, मूड़घाट, हड़िया और खझौला में शाम होते ही बड़ी संख्या में बेसहारा पशु आ जाते हैं। जिले में 40 किमी के बीच दो टोल बूथ हैं। टोल वसूल करने वाली कंपनी अयोध्या-गोरखपुर टोल्स प्राइवेट लिमिटेड वाहनों से टोल की वसूली में आगे हैं, लेकिन सुविधाओं के मामले में फिसड्डी।
कांटे से लेकर अयोध्या सीमा तक रोज हो रहे दो से तीन हादसे
फोरलेन पर कांटे से लेकर अयोध्या सीमा तक प्रतिदिन दो से तीन हादसे हो रहे हैं। गड्ढों और ऊबड़-खाबड़ (पैचवर्क) सड़क पर वाहन अनियंत्रित हो जा रहे हैं। टूटी सड़कों की गिट्टियां उखड़ कर सड़क पर बिखरी हैं। वाहनों के पहिये के नीचे पड़ने पर गिट्टियां हवा में उछलती हैं, जिससे हादसे का खतरा रहता है। यही नहीं, पेड़ों की डालियां बारिश और हवा के चलते सड़क पर झुकी हुई हैं, इससे राहगीरों को काफी दिक्कतें हो रही हैं। फोरलेन पर यातायात संकेतक और सफेद पट्टियां तक गायब हैं। सुरक्षा के लिए बनाई गई रेलिंग जगह-जगह टूट चुकी है, जिससे चालक हादसे के शिकार हो रहे हैं।
फोरलेन पर संकेतक और सफेद पट्टियां नहीं हैं मानक के अनुरूप
एनएचएआइ के पीडी सीएम द्विवेदी यह सही है फोरलेन पर गड्ढे हो गए हैं। संकेतक और सफेद पट्टियां मानक के अनुरूप नहीं हैं। टोल कंपनी के अधिकारियों को फोरलेन की मरम्मत कराने और सुरक्षा उपायों पर ध्यान देने के निर्देश दिए गए हैं।

