ब्यूरो चीफ आर एल पाण्डेय
लखनऊ। स्टडी हॉल एजुकेशनल फाउंडेशन (SHEF) में इंग्लिश एक्सेस माइक्रोस्कॉलरशिप प्रोग्राम की पूर्व छात्रा सुरभि कश्यप कहती है – “लड़कियों को पढ़ाने से राज्य एवं राष्ट्र का उद्धार हो सकता है.”
20 मई 2023 को, स्टडी हॉल एजुकेशनल फाउंडेशन (SHEF) में इंग्लिश एक्सेस माइक्रोस्कॉलरशिप प्रोग्राम की पूर्व छात्रा सुरभि कश्यप ने लड़कियों की शिक्षा के अधिकार के लिए रैली का आयोजन किया। प्रेरणा गर्ल्स स्कूल, प्रेरणा बॉयज स्कूल और इंग्लिश एक्सेस प्रोग्राम के छात्रों ने इस रैली में भाग लिया। इस रैली में 200 से अधिक सदस्यों ने भाग लिया | रैली का उद्देश्य बालिका शिक्षा के बारे में माता-पिता की जागरूकता बढ़ाना और उन्हें लैंगिक न्याय की आवश्यकता के प्रति जागृत करना था। यह मार्च दो गांवों उजरियाओं और गुवारी, गोमती नगर में निकाली गई। रैली एक बड़ी परियोजना का हिस्सा है जिसका उद्देश्य बालिकाओं के अधिकारों और शिक्षा के बारे में सामुदायिक जागरूकता बढ़ाना और उन लड़कियों को नामांकित करना है जिनकी शिक्षा पर रोक लगा दी गई है।
इस रैली स्टडी हॉल एजुकेशनल फाउंडेशन की फाउंडर डॉ उर्वशी साहनी, प्रेरणा गर्ल्स स्कूल की प्रिंसिपल राखी पंजवानी, वाईस प्रिंसिपल रोली सक्सेना, आरोहिणी इनिशिएटिव की प्रोग्राम मैनेजर प्रियंका सक्सेना साथ उनकी टीम के सदस्य, इंग्लिश एक्सेस की कोर्डिनेटर ज़रीने गार्सिया और ग्लोबल शेपर्स की वाईस क्यूरेटर सानिया अशर ने इस रैली में हिस्सा लिया।
सुरभि कश्यप ने लड़कियों की शिक्षा को बढ़ावा देते हुआ कहा की “लड़कियों को पढ़ाने से राज्य एवं राष्ट्र का उद्धार हो सकता है” और उन्होने रैली में मौजूद सभी लोगों को शिक्षा के अभाव से होने वाली समस्याओं के बारे में बताया।
देश को आगे बढ़ना हैं, तो बेटियों को पढ़ना हैं, जब लड़किया शिक्षित हो पाएंगी, तभी तो वो कुछ कर के दिखा पाएंगी , ज़ुबा की ज़ंजीरो को तोड़ो, भारत की बेटियाँ अब तो कुछ बोलो जैसे नारे लगाए।
छात्रों ने पोस्टर बनाकर व नुक्कड़ नाटक करके लोगों को जागरूक करने का कार्य किया। छात्रों ने समुदाय के सदस्यों के साथ बातचीत की और उन्हें एक प्रतिज्ञा लेने को कहा कि जब तक उनकी बेटियाँ पढ़ना चाहेंगी तब तक वे पढ़ाएंगे और शादी के लिए दबाव नहीं डालेंगे के लिए प्रोत्साहित किया।
प्रेरणा गर्ल्स स्कूल की छात्रा शिवानी ने कहा, “शिक्षा ही लड़कियों को सशक्त बनाने का एकमात्र साधन है। यदि
लड़कियों को शिक्षित किया जाता है, तो वे अपने अधिकारों को जानती हैं और वे उनके प्रति होने वाले
अन्याय से लड़ सकती हैं।”

