भारतीय ज्ञान परंपरा कार्यक्रम पर आधारित *भारत बोध परीक्षा-2026* का आयोजन दिल्ली विश्वविद्यालय, दिल्ली तथा विद्या भारती उच्च शिक्षा संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में सम्पन्न

भारतीय ज्ञान परंपरा कार्यक्रम पर आधारित *भारत बोध परीक्षा-2026* का आयोजन दिल्ली विश्वविद्यालय, दिल्ली तथा विद्या भारती उच्च शिक्षा संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में सम्पन्न
देश की उपासना ब्यूरो
दिल्ली:भारतीय ज्ञान परंपरा कार्यक्रम पर आधारित *भारत बोध परीक्षा-2026* का आयोजन दिल्ली विश्वविद्यालय, दिल्ली तथा विद्या भारती उच्च शिक्षा संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में अखिल भारतीय स्तर पर संपूर्ण भारतवर्ष के विश्वविद्यालयों, महाविद्यालयों तथा उच्च शिक्षा संस्थानों में अध्यनरत स्नातक तथा परास्नातक के विद्यार्थियों के लिए आयोजित की गई। जिसमें जनपद के एकमात्र परीक्षा केंद्र डॉ.राम मनोहर लोहिया महाविद्यालय, अल्लीपुर,‌हरदोई में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं ने प्रतिभाग किया । परीक्षा के उपरांत विद्या भारती उच्च शिक्षा संस्थान के सदस्य तथा परीक्षा के पर्यवेक्षक डॉ. योगेंद्र सिंह ने प्रतिभाग करने वाले सभी प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र वितरित किये। प्रमाण पत्र वितरण समारोह में उन्होंने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य हमारी प्राचीन सांस्कृतिक और बौद्धिक धरोहर का संरक्षण और पुनर्जीवन करना है। भारतीय ज्ञान प्रणाली में विज्ञान, कला, दर्शन, गणित, खगोलशास्त्र, चिकित्सा और व्याकरण जैसे अनेक क्षेत्रों में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। इस कार्यक्रम के माध्यम से इन प्राचीन परंपराओं को आधुनिक संदर्भ में पुनः प्रासंगिक बनाया जा सकता है। यह न केवल हमारी सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करेगा, बल्कि वैश्विक समस्याओं के समाधान में भी योगदान देगा, क्योंकि भारतीय ज्ञान परंपरा में पर्यावरण संरक्षण, आयुर्वेदिक स्वास्थ्य प्रणाली और सतत विकास की अवधारणाएँ निहित हैं।

आधुनिक भारत में आत्मनिर्भरता के उद्देश्य को साकार करने में भी यह कार्यक्रम सहायक होगा, क्योंकि इसमें स्वदेशी तकनीकों और आत्मनिर्भरता की परंपराएँ निहित हैं। भारतीय ज्ञान प्रणाली के गहन वैचारिक ज्ञान को शामिल करना आज के युवाओं को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह पाठ्यक्रम भारत की समृद्ध विरासत पर प्रकाश डालता है और “भारत की धरोहर और विरासत पर गर्व करें” का संदेश देने का प्रयास करता है।

विद्या भारती उच्च शिक्षा संस्थान के उपाध्यक्ष डॉ. शीर्षेन्दु शील त्रिवेदी ने कहा *राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अंतर्गत भारतीय ज्ञान परंपरा को पाठ्यक्रम में शामिल करने से छात्रों में अपनी सांस्कृतिक पहचान के प्रति गर्व और आत्मविश्वास का विकास होगा साथ ही आधुनिक विज्ञान और प्रौद्योगिकी के साथ पारंपरिक ज्ञान का समन्वय स्थापित कर शोध और नवाचार के नए अवसर प्रदान करेगा।* भारतीय सभ्यता की दो अनूठी और विशिष्ट विशेषताएं हैं। पहली, यह आधुनिक विश्व में एकमात्र जीवित सभ्यता है, जो अपने अतीत से जीवंत संबंध बनाए हुए है। दूसरी, जब कहीं भी, कोई भी जीवन, मृत्यु, अस्तित्व के अर्थ और उद्देश्य जैसे शाश्वत प्रश्नों से जूझता है और जीवन के शाश्वत सत्य को अनुभव करना चाहता है, तो भारत में ही उन्हें शांति और समाधान मिलता है।भारत के समृद्ध अतीत से प्रेरणा लेकर और उन प्रथाओं को समझते हुए, जो अपने समय से बहुत आगे थीं और पूरी तरह से सतत विकास पर आधारित थीं, एक नए भारत का निर्माण संभव है। विद्या भारती उच्च शिक्षा संस्थानों के शिक्षकों और विद्यार्थियों को भारतीय ज्ञान प्रणाली के बारे में जागरूकता विकसित करने के लिए एक मंच प्रदान करता है।

परीक्षा के संयोजक डॉ. शशिकांत पांडे ने कहा आधुनिक संदर्भ में प्रासंगिकता
वर्तमान समय में, अतीत की प्रथाओं का मूल्यांकन करना और उन्हें समाज के उत्थान के लिए लागू करना आवश्यक हो गया है। यह पाठ्यक्रम शिक्षार्थियों को भारतीय ढांचे और मॉडलों का उपयोग करके स्वतंत्र और मौलिक रूप से सोचने में सक्षम बनाता है, ताकि वर्तमान व्यावसायिक दुनिया की समस्याओं को हल किया जा सके। यह पाठ्यक्रम उच्च शिक्षा संस्थानों के सभी शिक्षकों को भारतीय ज्ञान प्रणाली के प्रति जागरूकता विकसित करने और प्राचीन भारतीय प्रथाओं को समझने के लिए एक उत्कृष्ट मंच प्रदान करता है। यह पाठ्यक्रम आधुनिक शिक्षा के साथ भारतीय ज्ञान परंपरा का समन्वय स्थापित करता है और शिक्षकों को प्रेरित करता है कि वे इसे अपने शिक्षण और अनुसंधान में प्रभावी रूप से शामिल करें।

वैश्वीकरण के इस युग में, यह कार्यक्रम हमारी संस्कृति और पहचान को संरक्षित करते हुए, नैतिकता और आध्यात्मिकता के सिद्धांतों को बढ़ावा देकर समाज में शांति और सामंजस्य स्थापित करने में सहायक होगा। साथ ही, यह शोधकर्ताओं और छात्रों को भारतीय ज्ञान परंपरा के विविध पहलुओं पर शोध करने और उन्हें नई दृष्टि से प्रस्तुत करने के लिए प्रेरित करेगा। भारतीय ज्ञान परंपरा कार्यक्रम, हमारी सांस्कृतिक धरोहर को आधुनिक संदर्भ में उपयोगी बनाते हुए, न केवल भारत बल्कि पूरी दुनिया के लिए ज्ञान और विकास का एक अमूल्य स्रोत साबित हो सकता है।

परीक्षा के सह-संयोजक श्री आनंद विशारद ने कहा कि यह शिक्षकों के लिए भारतीय ज्ञान प्रणाली (आईकेएस) के क्षेत्र में अवलोकन और जागरूकता प्रदान करता है ।
इसमें सीखे गए सिद्धांत तकनीकी और गैर-तकनीकी डिप्लोमा/स्नातक/स्नातकोत्तर कार्यक्रमों में एक स्वतंत्र पाठ्यक्रम के रूप में पेश किए जा सकते हैं।

कार्यक्रम का संचालन डॉ गीता सिंह ने किया कार्यक्रम में सभी शिक्षक व छात्र व छात्राएं उपस्थित रहीं।

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