मेडिकल कालेज जौनपुर में नवप्रवेशित छात्रों का “कैडवर शपथ” समारोह का आयोजन
देश की उपासना ब्यूरो धनंजय विश्वकर्मा
*जौनपुर:* उमानाथ सिंह स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय, जौनपुर के प्रधानाचार्य प्रो० आर०बी० कमल के दिशा निर्देश में विभागाध्यक्ष एनाटॉमी, प्रो० भारती यादव ने दिनांक 11 अक्टूबर, 2025 को एम0बी0बी0एस0 बैच 2025-26 के नवप्रवेशित विद्यार्थियों को कैडवर शपथ दिलाई। डीन रिसर्च, प्रो० रूचिरा सेठी ने अपने उद्बोधन में कहा कि कैडवर शपथ चिकित्सा शिक्षा का अत्यंत पवित्र एवं भावनात्मक क्षण होता है। यह न केवल विद्यार्थियों को चिकित्सा विज्ञान की आधारशिला मानव शरीर रचना के अध्ययन की ओर अग्रसर करता है, बल्कि उन्हें मानवता, करूणा और नैतिकता के मूल्यों से भी जोड़ता है। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार एक जीवित गुरू हमें ज्ञान का मार्ग दिखाता है, उसी प्रकार कैडावर अर्थात् शरीर दान करने वाला व्यक्ति चिकित्सा विद्यार्थियों का “प्रथम गुरू” होता है। हमें उनके प्रति सम्मान, संवेदना और कृतज्ञता का भाव सदैव बनाए रखना चाहिए। उन्होंने सभी विद्यार्थियों को उज्जवल भविष्य की शुभकानाएं देते हुए कहा कि *”यह शपथ केवल अध्ययन की शुरूआत नहीं, बल्कि एक आजीवन दायित्व की याद दिलाती है-मानवता की सेवा ।”*
विभागाध्यक्ष, प्रो० भारती यादव ने कहा कि कैडवर शपथ चिकित्सा शिक्षा का सबसे पवित्र परंपराओं में से एक है। यह न केवल विद्यार्थियों को चिकित्सा विज्ञान की प्रारंभिक जानकारी देती है, बल्कि उन्हें अनुशासन, संवेदना और मानवता का भी पाठ पढ़ाती है। उन्होंने कहा कि जिन व्यक्तियों ने शरीर दान किया है वे वास्तव में चिकित्सा शिक्षा के सच्चे प्रेरणास्त्रोत हैं। विद्यार्थियों को चाहिए कि वे इन कैडावर्स के प्रति गहरी श्रद्धा और कृतज्ञता का भाव रखें तथा अध्ययन के प्रत्येक चरण में अनुशासन और मर्यादा का पालन करें। विभागाध्यक्ष ने छात्रों से आग्रह किया कि वे अपने व्यावसायिक जीवन में न केवल एक कुशल चिकित्सक बनें बल्कि एक संवेदनशील और नैतिक डॉक्टर के रूप में समाज की सेवा करें।
सहायक आचार्य, डा० अर्चना चौधरी एवं डा० प्रियंका सिंह ने संयुक्त रूप से संबोधन में कहा कि कैडवर प्रत्येक चिकित्सा विद्यार्थी के लिए “मौन गुरू” के समान है, जो उन्हें मानव शरीर की गहराइयों को समझने का अवसर प्रदान करता है। उन्होंने बताया कि शरीर दान करने वाले व्यक्ति का यह महान योगदान मानवता की सर्वोच्च मिसाल है। विद्यार्थियों को चाहिए कि वे अध्ययन के दौरान इन कैडावर्स के प्रति सम्मान, संवेदना और कृतज्ञता का भाव बनाए रखें।
इस अवसर पर डा० मतीन अहमद खान, डा० सैयद उस्मान, डा० दिग्वेश यादव डा० किशन उपाध्याय एवं कर्मचारी- पवन, जनमेजय, सतीश, मदन, रामअचल, बृजेश, रामसिंह एवं नवप्रवेशित छात्र/छात्राएं उपस्थित रहें।

